Home me or mera bhagwan... No title No title personMohan Thanvi November 21, 2010 2 share में और मेरा सर्जन ----- जिस दर पे कभी ताला न लगा ऐ खुदा वो ही अपना घर देना ओरो की क्या बात करू में नादान सुबह ही अखबार में पढ़ा .... मंदिर में चोरी हो गई..... Tags me or mera bhagwan... Facebook Twitter Whatsapp Newer OlderNo title
जीवन का श्रम ताप हरो हे!
ReplyDeleteसुख सुषुमा के मधुर स्वर्ण हे!
सूने जग गृह द्वार भरो हे!
लौटे गृह सब श्रान्त चराचर
नीरव, तरु अधरों पर मर्मर,
करुणानत निज कर पल्लव से
विश्व नीड प्रच्छाय करो हे!
उदित शुक्र अब, अस्त भनु बल,
स्तब्ध पवन, नत नयन पद्म दल
तन्द्रिल पलकों में, निशि के शशि!
सुखद स्वप्न वन कर विचरो हे!
(सुमित्रानंदन पंत )
sundar hai... जिस दर पे कभी ताला न लगा
ReplyDeleteऐ खुदा वो ही अपना घर देना... badhiya.