Friday, November 30, 2012

सिंधी नाटक कृपालु संत साधु वासवाणी

सिंधी नाटक कृपालु संत

जे पहिरियें सीन जो आखिरी भांङों पेशु आहे --

( इयो नाटक हिंदू अजमेर में अरबी सिंधीअ में साया थिअलि आहे )

... दादा साहिब चवनि था, डिसो। जहिं संत माण्हूंनि खे इ न बल्कि हरेकु प्राणीअ खे हिकु जेहिड़ो भगवान जो सृजन बुधायो हो, उन्हींअ इ संत लाइ झूनी ऐं नई टहीअ में तकरार जी गाल्हि बुधी मूखे खिल इ त इन्दी।
माण्हूं चवनि था, दादा तव्हां असांखे साधु वासवाणी साहिब बाबत जाण ड्यो।
दादा जे पी वासवानी साहिब चवनि था, - संत साधु वासवानी त पाण चवन्दा हुआ, जीव मात्र में फर्कु न कजे। ऐं तव्हां उननि इ संतनि जी गाल्हियूंनि खे दरकिनार करे जीव मात्र इ न बल्कि खुद उननि संतनि जे नाले ते बि झेड़ो था कयो। इननि संतनि त पहिंजी सजी हयाती तप करे भगवान खां माण्हूनि जो भलो घुर्यो।
माण्हुनि जे वरी जोर डिहण ते दादा साहिब कृपालु संत साधु वासवानी जी हयाती ऐं उननि जे उपदेशनि बाबत तफसील सां गाल्हियूं बुधाइनि था। इनि वक्ति इ पार्टी में दादा श्याम जो भजन गूंजे थो, -
अलख धाम मां

नाल्हे मौत तिनि लाइ, अंखियूंनि जिनि जूं निहारनि,
पहाड़नि त तिनि डे, जीअं प्यारनि खे पुकारनि!
रहनि रहम में से त आल्यिूंनि अंख्यिूंनि,
सबक इक त सिक जो, से आहिनि सुख्यूं!
पया था त कोठनि, प्रभुअ जा पहाड़ा!
अचनि यादु वरी वरी, पया से त प्यारा!
करे केरु दूर, प्यारनि जी जुदाई !
जीवन आहे जिनि जी, प्रभुअ में समाये!
मरे ही बदनु थो, जिस्मु ही जले,
पर आत्मा अमर, सदा पयो हले!
काल डिस जो घर, फकत काल ढाहे,
पर आत्मा अजरु ऐं अविनाशी आहे!
मरे कीअं कोई ऊंव, न कोई कीअं साड़े,
न कोई मौत परदो, रखी उन परे
अलख धाम मां आहे, नूरी निमाणी
रहे रोज रोशन, न रह तूं वेगाणी।

दादा जे पी वासवानी साहिब इयो भजन अंख्यूं बूटे झूमन्दे झूमन्दे बुधी रहिया हुवा। जीअं इ भजन पूरो थे तो, दादा साहिब हथ जोड़े भगवान ऐं संत साधु वासवानी खे निमनि था। भरियलि अंख्यूं उघी करे दादा साहिब पहिरीं नूरी गं्रथ जी वाणीअ जे दोहनि जी व्याख्या था कनि । अध्यात्म जी इनि गाल्हि खे पूरो करण बैद दादा साहब तफसील सां कृपालु संत साधु वासवानी जे जन्म खां वठी उननि जी हयातीअ बाबत बुधाइण शुरू था कनि।
जीअं जीअं संतनि बाबत बुधाइन्दा था वंञनि, तीअं तीअं माण्हुनि जी अंखियूंनि जे अगियूं कृपालु संत साधु वासवानी साहिब जियूं लीलाऊं इअं तियूं थिअनि जण त सबकुझु साम्हूं ही थी रहियो आहे।
दादा जे पी वासवानी साहिब जो आवाजु गूंजी रहियो आहे। माण्हूनि जी निजरनि अगियूं ज्ञान जी ज्योतिअ सां चिमकन्दड़ दादा साहिब जी मूरति मुश्की रही आहे।

सीन -2................................

Thursday, November 29, 2012

अजब कीमियासाज ...

sckech by & PIYU
अजब कीमियासाज हैं 'वे' लोग । मिट्टी को सोना बताते हैं ...  । लेकिन इससे नुकसान न सोने को होता न मिट्टी को । क्योंकि तिजारत पसंद हैं बाकी लोग... अपने मिट्टी के ढेलों की भी कीमत  कीमियासाजों  से ही सोने के भाव वसूल लेते हैं ।  = आखिर नुकसान कीमियासाज को ही होता है ।

Tuesday, November 27, 2012

प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है।

Novelist Mohan Thanvi Bikaner
प्रकृति पहले स्वयं बदलती है फिर हमें बदलना ही पड़ता है।

Sunday, November 25, 2012

पांच रुपए की दीर्घ कथा

Hindi / Sindhi / Rajasthani Novelist Mohan Thanvi 

पांच रुपए की दीर्घ कथा- 

 बाबूजी साग वाले से बोले -  बेटा चार टाइम के लिए 2-2 रुपए की मिर्च धनियां अदरक और 5-5रुपए की पालक मैथी मूली तोल दोगे या ज्यादा का लूँ ? साग वाले ने कहा काफी है बाबूजी । आपको न दूंगा तो जीवन कैसे सुधारूंगा । और एक रुपया खुला न हो तो 20 रुपए ही दे देना । रुपए चुका कर साग से भरा थैला संभाल बाबूजी बोले - महंगाई को तो पंख लगे हैं । वृद्धावस्था पेंशन के हम दोनों को मिलने वाले 500 रुपए से हम दोनों का गुजारा नहीं होता बेटा । जाने लगे कि एक बच्चे ने साग वाले की पीठ पर चढ़ते हुए कहा , बाबा स्कूल जा रहा हूं खर्ची दो । साग वाले ने उसे लाड़ करते हुए 5 रुपए दिए । बच्चा तुनक कर बोला - ये क्या बाबा, 5 रुपए की तो मिर्ची भी नहीं आती और मुझे लेनी है चॉकलेट। कम से कम 50 रुपए लूंगा । साग वाले ने बाबूजी से नजरें चुराते हुए 50 रुपए देकर बच्चे को विदा किया । बाबूजी भी रुके नहीं । साग वाला मुझसे बोला - देख लो मास्टर जी । चॉकलेट 50 और साग 5 का, इसलिए महंगाई तो बढ़ेगी ही । 

Tuesday, November 20, 2012

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...
देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...

गीत जीत रा गावां ला जी... करणी माता जावांला...
देशनोक में करणीमाता जी के भी दर्शन किए तो अहमदबाद से आए भतीजे पिंटू ने काबा के दर्शनार्थ बहुत जतन किए... श्वेत काबा को तो कैमरे में नहीं ला सके...

Saturday, November 17, 2012

लहरें सागर की / उनका ख्याल भी ...

उनका ख्याल भी लहरें सागर की ...    

उनकी मुस्कान भी 
कहकहा 
मान 
दिल 
धड़क धड़क जाता है ...
 
वो 
आंख की कोर से देखते हैं 
आहट पे ... 
फिजां खुशबूदार हो जाती है ...
 
वो तो हैं हीं बलखाती उमंगें ... 
उनका ख्याल भी 
लहरें सागर की 
लगता है ... 
दिल 
धड़क धड़क जाता है ...

Friday, November 16, 2012

बचपन की दोस्ती और किशोरवय की मोहब्बत


भुलाने लगे कोई जब तो...
ठहरे हुए पानी में...
कंकर मार कर ...
हिलोरे उठाना, बताना...
बचपन की दोस्ती और...
किशोरवय की मोहब्बत...
कम नहीं होती ताउम्र ...
... वो भी जानते हैं...
ये सब...
फिर भी...
रहते क्यों दूर दूर...
... बता दो कोई उन्हें ये...
सपने देखे हैं---
 उनकी भी आंखों में---
हमने भरपूर !

Friday, November 9, 2012

अबकै दीवाली री मंगल वेला मायड़ भाषा मान्यता सागै..

दीवाली रा दीआ दीठा अबकै...

गजानंद जी रिद्धि सिद्धि सागै...

महालक्ष्मी विष्णु जी सागै...

अबकै दीवाली री मंगल वेला मायड़ भाषा मान्यता सागै...

जै जै गणेश जै जै महालक्ष्मी...
जै जै मां मरु भूमि... जै जै मायड़ भाषा ...

शुभ मंगल लाभ दीपावली

नूवीं पीढ़ी इण ग्यानगंगा में डुबकी लगावण सूं वंचित नीं रै जावै ...kailandar sun barai ... Rajasthani Novel se chuninda ansh....

kailandar sun barai ... Rajasthani Novel se chuninda ansh...

राजस्थानी नावेल कैलंडर सूं बारै से चुनंदा अंश ...

बाबोसा आपरै अ‘र समाज मांय जित्तो बदळाव देख्यो, ओ सगळो बीयांनै बारै सूं आयोड़ा पण अबै पकायत अठै रा ई पिछाण बणायोड़ा इण लोगां रै बदळाव सूं कमती लाग्यो। राजस्थान मांय बदळाव में इयां लोगां रो घणो महतव है। बंटवारै री पीड़ हिरदै में दाब्योड़ा अठै आवंणआळा घणा है। बंटवारै सूं पैळी आयोड़ा लोगां आपरी जगां अ‘र पिछाण सहर में बणा ली ही। अबै सगळा अठै रा ई यानी राजस्थानी ई गिणीजै।
बाबोसा ठीक ही कैवंता हा -

अेक मारग सूं जावै कित्ताई ऊंट, कित्तीई अरथियां
अ’र ठाकुरजी री सोभाजातरा निकळै
टाबर स्कूल भी अठै सूं ही जावै
जुआरी, सट्टेबाज भी ईं मारग रो जातरी
बळद अ’र बस-ट्रक भी ईं मारग सूं बैवै
कोई तीरथ करै कोई पूगै राज में
मारग तो मारग रैवै मिनख री सोच बणै मरज

मेलोडी बीं बगत तो मरज री बात जाण कोनि सकी पण जद खुद राजस्थान रै जीवटआळा मिनखां सूं मिल’र प्रकष्ति सूं संघर्ड्ढ करणो सीख्यो तो जाण सकी कै ओ मरज कांई होवै। इण मरज री जाण बीनैं राजस्थान रै जीवटआळा मिनखां सूं मिल’र होयी। अे जीवटआळा मिनख आपरै जीवन संधर्ड्ढ मायं मेलोडी नै सामिल कर्यो। मेलोडी, जिकी अठै आया सूं पैळी अमेरिका मायं दो-चार साल में पुरुड्ढ बदळ लैवंती ही, फिलिप्स सूं मिल्या बाद भारतीय संस्कष्ति री दीवानी हुयगी। भारत री आध्यात्मिकता री बात्यां उणनै राजस्थान खींच लायी। बाबोसा अ’र किरपाराम सूं जद बा मिली बीं दिनां में उणनै राजस्थान री विकास जातरा रो इत्तो ज्ञान कोनि हो जित्तो बाद मेें होवंतो गयो अ’र बा अचरज में पड़ती गई।
देस-समाज री विकास जात्रा री जाणकारी पौथ्यां में भले ही छप्योड़ी है, छपती रैवे, दुनिया बांचती रैवे पण जियांरै विकास री जात्रा है बै ई मिनख अणजाण रैवै। आ बात गांवां में कित्ताई मिनखां माथै उतरती दिखै। घणा मिनख है जियांनै कार-ट्रक-बस अ‘र रेलगाड़ी जिसी आधुनिक चीजां री जाणकारी है। अजकाळै टीवी अ‘र कम्प्यूटर माथै दुनियाभर री जाणकारी फोटूआं समेत दिखै आ बात भी लोग जाणै पण कोलायत रै एक गांव सूं दो-तीन बरस पैळी टाबरां रो एक दल नई दिल्ली गयो। अचरज री बात आ कोनी कि दल दिल्ली गयो। अचरज री बात तो आ है कि बीं दल में षामिल 15-16 साल रै टाबरां भी पैळी बार रेलगाड़ी देखी। बस देखी अ‘र दिल्ली में ऊंची-ऊंची बिल्डिंगा देख‘र बै टाबर अचरज रै सागर में उतरग्या। इण बात में कमी मिनखा री है कै राज री, आ सोचण री बात है।
मेलोडी आ बात भी जाणगी ही कै राजस्थान रै गांवां मायं घणा लोग आखरग्यानी भलेई कोनी पण बियांरे हिरदै में भगती भाव रो समन्दर बैवै। श्रीमद्भागवत री कथावां रै अलावा भी बै भांत-भांत री कथा सुणै। लोकदेवता बाबा रामदेव, नखत बन्ना अ’र ओसियां माता रै मंदिरां में कोसों दूर सूं लोग दरसन करणनै पूगै। कथा में रस होवै। संगीत हूवै। ताल हूवै। नूवें जमाने रे सागै कदमताल मिला‘र चालणरी एक कसिस हूवै। अचरज ओ भी कै कथा सुणावणआळा खुद निरक्षर होवंता भी जतन करै कै नूवीं पीढ़ी रो एक टाबर भी इण ग्यानगंगा में डुबकी लगावण सूं वंचित नीं रै जावै। बगेचियां अ‘र संता रै स्थान माथै भी बै संता सागै इण भांत री सीख दिराई जावै। संत भी समाज नै रास्तो दिखावण रो काम करै। संता री वाणी में ओज हूवै। बीं ओज सूं प्रवचन सुणनआळा रे हिरदै में कीं करण री इंछा जाग्रत हूवै। बाबो सा मेलोडी नै ओ भी बतायो कै कोई बगत हो जद अेक सहर सूं दूसरे सहर तांईं चिठ्ठी-पत्री पूगते-पूगते चार-छह दिन लाग जावंता। अजकाळै कुरियर सूं दूसरे दिन समाचार मालूम कर सकां। इत्तोई नीं बल्कि टेलीफोन सूं तो साम्हींआळा सूं बातचीत भी हो जावै, ,हाथोंहाथ। जमानो तो और भी आगे बढ्योड़ो है। कम्यूटर सूं ई-मेल होवै। आम्हीं-साम्हीं वीडियो रै मार्फत बातचीत होवै। पांच-दस मिनट मांय दुनिया रै अेक सूं दूसरे देस में बैठ्योड़े मिनख नै कांफें्रसिंग री मार्फत देख्यो-सुण्यो जावै। इंटरनेट सूं तो अजकाळै चारों धाम री जात्रा रो पुण्य मिल सकै। वेबसाइट माथै कित्ताई मिन्दरां रा दरसन होवै।
बाबोसा नै अेक पीड़ भी है। बै आंख्यां मायं आसा री किरणा चमकावंता बतायो - इत्तो सब है पण निरक्षरां री आज भी कमी कोनी। जात्रा रै वास्ते आज भी कित्ताई गांवां में साधन कोनी। पाणी-बिजली व्यवस्था रो अभाव है। कित्ताई गांव है जठै आज भी स्कूल कोनी। स्वास्थ्य केन्द्र कोनी। सड़क कोनी। सुराज सहर रै नजदीक है इण वास्ते बठै सुविधावां पूगी है। बाबोसा ही नीं मेलोडी नै राजस्थान रै बाकी सहरां रै लोगां भी अठै री काफी बात्यां बताई ही। क्यूंकि मेलोडी अबै राजस्थानी संस्कष्ति नै आपरै मायं समेट रैयी ही इण वास्तै उणरो वास्तो लेखकां अ’र कवियां सूं भी रैवंतो। जयपुर मायं अेक कवि सम्मेलन में जद ख्यातनाम कवियां आपरी अेक रै बाद अेक कवितावां री बरसात कर दी ही तो कद आधी रात भोर में बदळण लागी कोई नै ठा कोनि पड़ी ही। मेलोडी ने उण सम्मेलन में सुण्योड़ी आ कविता अजतांईं खूब याद है -

धूळ भरी बुद्धि सूं कियां दीसै सूरज, आंख्यां में माया भरी कोढ़ी होसी तन
काळो कळूटो तन जियां बियां ही बीतै ईसै लोगां रो जीवन
सिंझा रो सूरज दिनूगे रो चांद
कुआं में भांग घोळै भजै भजन
दीसै मिनख रूंख माथै
इनसानियत होयगी दफन
पूरब-पस्चिम सागै रैवै ईसो होवै जीवन

Tuesday, November 6, 2012

एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है...


एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है... ! 2009 में प्रकाशित सिंधी नॉवेल केदार साहब से चुनिंदा और संपादित अंश...
एलियनए कींअ न गोलमटोल मुंह वारो सिनेमा में डेखारियो अथवूं! परए असांजे पौराणिक ग्रन्थनि में बि त एहिड़नि चेहरनि जी गाल्हि डाडी बुधाइन्दी आहे! झूलेलाल!
केतराई दफा पाड़े में गोपाल डिठो आहेए होलीअ.डियारीअ खां अगु सिन्धी.पंजाबीए मुल्तानी पाड़े वारा भितनि ते गाइं जे छेणे सांए सिन्दूर ऐं बियूनि रंगदार शयूनि सां ऐहिड़ा लीका पाइन्दा आहिनिए जेके एलियन वांङुरु इ त लगन्दा आहिनि! घणो करे लीका पाइण जो कमु बुढ़यूं माइयूं कन्दयूं आहिनि। त छाण्ण्ण् त छा असांजी सिन्ध में माण्हूनि खे ऐहड़े एलियन जी पहिरी खां इ खबरु हुई! उननि एलियननि खे जूने जमाने में माण्हू देवी.देवताए पित्तर या केंहिं बे नाले सां पुकारीन्दा हुवा!
गोपाल पहिंजी एहिड़नि एलियननि जी दुनिया में गुमु हो ऐं रामी पहिंजी डॉल खे डाडीअ जे अगियूं नचाये पूछेसि पई . अम्माए इनि डॉल खे गाल्हाइणि केंहि सेखारियो! सखीबाईअ खे जयपुर जे डॉ कन्हैया अगनाणी जो लिख्यलि किताबु यादु आयो . बबलूअ खे सिन्धी सेखारियो न बाबा! अजु जे बबलूअ खे त सिन्धी सेखारण लाइ मास्तर रखण बि डुख्यो थी वयो आहेए पर जूने जमाने में असांजी सिन्ध जियूं गुड्डियूं बि सिन्धी गाल्हाइन्दियूं हुइयूं! झूलेलाल! इअं कींअ थी सघन्दो आहे!
सखीबाईए गोपाल ऐं रामी टेई हिकु बे खे पहिंजे दिलु में वसियलु दुनिया सां वाकिफु कराइणि पया चाहिनि। किस्मत जी गाल्हि आहेए टीनि जे मनु जियूं गाल्हियूं मनु में इ दबयलि आहिनि। उवईं जीअं इनि दुनिया जे हरेक षख्स जे मनु जीयूं गाल्हियूं जुबान ते कोन अची सघन्दी आहे।
दिमागु ते जोर डेई सखीबाईअ यादु कयोए  अबाणाए हलु त भजी हलूं जेहिड़ा सिनेमा बि उनिखे यादु आया। हलु त भजी हलूं सिनेमा में त लता मंगेषकर बि हिकु गानो ष्मुंहिंजा सुपरी तोखां विछुड़ीण्ण्ण्ष् गातो हो। सखीबाई पहिंजी सिन्धु जी यादुनि में वरी गुमु थी वई। ऐहिड़िनि गाल्हिनि में भला छो न गुमु थीन्दीए जेके उनिजे नन्ढपणि ऐं मादरेवतन सां गंढयलि आहिनि! हमेषा वांङुरु अजु बि उव्हा पहिंजे जेहनु में वेठलु सिन्धी कलाए सभ्यता ऐं संस्कृति जी गाल्हियूंनि जी उथल.पुथलि में विचरजी वई।
सखीबाईअ जियूं इये गाल्हियूं नन्ढपणि खां केदार बुधियूं ऐं हाणे उनजे बियनि बारनि खे बुधणजो वंझु मिलन्दो आहे। उननि जे दिलोदिमागु में पहिंजी मिठड़ी सिन्धु बाबत बुधलि गाल्हियूं वसी वयूं आहिनि। हाणे इननि बारनि खे बि इननि जी जाण थी वं´ें त नई टहीअ खे अचणि वारे वक्त में सिन्धु ऐं सिन्धीयत विरासतु में मिली सघन्दीए उननि खे पहिंजी सिन्धीयत खे गोलणो कोन पइन्दो।
पहिंजी भाषाए साहित्य ऐं संस्कृतिअ सां उवे परे कोन थीन्दा बल्कि मिठी सिन्धी बोली उननि खे सुरग जेहिड़ी पहिंजी सिन्धु जी महिमा बुधाइन्दी।
फिक्रुरुजी इया गाल्हि आहे। वडनि जी विरासत खे नई टहीअ तांई पुजाइण जो जब्बो पैदा करणो आहे लेकिन अजु सभई पहिंजेई कमनि में पूरा लगा पया आहिनि।
छा सिन्धीयत बाबत अचण वारी नई टही कुझ जाण वठण काण सिन्धी रिसालनि बदरां अंग्रेजीए हिन्दी या बियूनि भाषाउनि जी मुहताज थी वेन्दीएएण्ण्ण् इया चिंता छा केंहिंजे बि दिमागु में कोने!

लकीरें ...आंखें ...अनंत


क्या होगा
मिट जाने वाली
लकीरें खींचने से
आंखें तो
अनंत तक
देखती रहेंगी

Thursday, November 1, 2012

नाट्य कृति... जो छू गई दिल को...

नाट्य कृति... जो छू गई दिल को...
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sindhi - पुस्तक परिचय
नाटक -     हत्या हिक सुपने जी (  Besed on Cross purposes – Albert Camus )
लेखक -     हरिकांत जेठवानी
प्रकाषक -     सुनील जेठवानी, 4 प्रकाष सोसायटी
                 राधे हरि अपोजिट निर्मल कान्वेंट
                 राजकोट 360007
संस्करण - 2012
सुपने जी हत्या मंझ रंगकर्म जी खुषी
सिंधी साहित्य जगत मंझ हरिकांत न सिर्फ नाटकनि लाइ बल्कि सिंधु समाज, साहित्य धारा ऐं आखाणी जे संपादन जे करे हमेषह याद रहिण वारो नालो आहे। पहिंजी लंबी हिंदी कविता एक टुकड़ा आकाष समेत हरिकांत हिंदी साहित्य संसार जो बि जातलि सुञातलि लेखक आहे। कविता में नवाचार ऐं पहिंजी कहाणिनि में समाज जी नुमाइंदी कंदड़ चरित्रनि खे बुलंद सिंधी जुबान डिअण वारे हरिकांत जेठवानी जो नवों नाटक हत्या हिक सुपने जी इनि साल 2012 मंझ साया थी आयो आहे।
मूल भावना खे कायम रखंदे नाटक जी आत्मा खे सिंधी भाषा जो वगो पाराइण हरिकांत जी लेखनीअ जो इ कमु थी सघंदो आहे।  ईआ खासियत इ हरिकांत जे इनि नाटक खे खास अहमियत वारो साबित करे थी। नाटक खे पुस्तक रूप में पाठकनि तोणी पहुंचाइण जोे कमु करण लाइ लेखक हरिकांत, प्रकाषक सुनील जेठवानी, कवर डिजाइनर मेहरवान ममतानी ऐं कॉपी राइट रखदंड़ श्रीमती राधा जेठवानी खे साधुवाद। - मोहन थानवी ( publish in sujagu sindhi manthly Nov 2012 )

पढ़ने वाले आगे निकल गए ... पढ़ाने वाले पीछे रह गए

sindhi novel Kartar singh by mohan thanvi 

महंगाई सज संवर कर बाज़ार पहुंची
बाकी सब पीछे हट गए
भ्रष्टाचार  की बोली में
कुछ लोगों के जेब कटे जूते  फट गए
पुलिस काबू  पा न सकी...
चीखों से सरकार के कान फट गए
महंगाई मिस वर्ल्ड हुई
राजा - भ्रष्टाचारी  कुर्सियों पर जुट  गए
पढ़ने वाले आगे आगे आगे और आगे निकल गए ...
पढ़ाने वाले देखो हाय ... कितना  पीछे रह गए