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'दीदी' ने ये क्या कर डाला, दिल्ली में हो गया झमेला...




औरों से हटकर सबसे मिलकर


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15 जनवरी 2026 गुरुवार

खबरों में बीकानेर


✒️@Mohan Thanvi

'दीदी' ने ये क्या कर डाला, दिल्ली में हो गया झमेला...



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'दीदी' ने ये क्या कर डाला, दिल्ली में हो गया झमेला...

कहावतों के आइने 8
अंधा गुरु, बहरा चेला, मांगे हड़ दे बहेड़ा   
- मोहन थानवी 
पश्चिम बंगाल में ईडी की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित रूप से अनधिकृत दखलंदाजी कर कुछ कागजात ले जाने तो दूसरी तरफ कुछ खुदगर्जों द्वारा दिल्ली में अवैध अतिक्रमणों को हटाने के दौरान इधर की बात उधर उछालने संबंधित प्रकरणों ने राजनीतिक जगत और मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्मों पर चर्चाओं की आंधी चला दी है। ईडी की रेड और दिल्ली प्रकरणों को सुनते हुए लोग बरबस कह उठते हैं - ऐसा तो बहुआकांक्षी उन्मुक्त माने जाने वाले कर सकते हैं। 'दीदी' ने ये क्या कर डाला, दिल्ली में हो गया झमेला...! इसके साथ ही सुप्रबंधन और सुशासन के क्षेत्र में हमारे बुजुर्गों की एक सीख बेसाख्ता याद आ रही है - शक्ति प्राप्त होने पर अपना विवेक और धैर्य नहीं खोना चाहिए। यह सीख जनता जनार्दन के मतदान से हासिल शक्ति से समृद्ध हुई 'दीदी' के स्वेच्छाचारी के समान किए हैरतअंगेज कार्य से याद आई है। राजनीतिक खबरों की दुनिया से राब्ता रखने वाले जानकार इस मामले को इतिहास के कतिपय निरंकुश शासकों से जोड़ कर सुन-सुना रहे हैं। लोगों का कहना है - दोषी को घबराहट और पकड़े जाने की शंका रहती है। असलियत तो पेचीदगी भरी जांच के बाद ही आमजन जान सकेंगे लेकिन दीदी का ईडी पर ही दोषारोपण करते हुए एफआईआर तक करवाने की बात कहना जानकारों को और भी अधिक हैरत में डालता है। लोगों को चोर मचाए शोर, चोर चोर मौसेरे भाई के साथ-साथ उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे जैसे किस्से कहने का मौका भी मिलता है।
दिल्ली में अवैध अतिक्रमण ध्वस्त करने से संबंधित प्रकरण में तो कार्रवाई को धार्मिक आस्था स्थल से जोडकर दूसरा ही रुख देने वालों में जनप्रतिनिधियों तक के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। कार्रवाई को भड़काऊ रूप से बताते हुए आरोपी अक्खड़ लोगों को समाज और देश के लिए एक बड़े झमेले को खड़ा करने में तनिक भी लाज शर्म नहीं आई ! ऐसे मामलों की जानकारी रखने वाले इसे अफसोस की बात बताते कहते हैं - अंधा गुरु, बहरा चेला, मांगे हड़ दे बहेड़ा ! जानकारों का कहना है - अपने स्वार्थ को सिद्ध करने में ऐसे लगे लोग निरंकुश होकर अपनी डफली, अपना राग अलापते हुए ना तो देश की चिंता कर रहे हैं ना ही समाज का हित देख रहे हैं।




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