Wednesday, January 7, 2015

रेत का जीवन

रेत का जीवन
रेत का भी जीवन है
अपना संसार है
समाई धूप की गर्मी है
आसपास बिखरे कांटे हैं
कहीं रेत पर गुलिस्तां बने
कहीं ताल तलैया खुदे
कहीं गगनचुंबी इमारतें हैं
खेत किनारे रेललाइन है
इसी रेत में पनपे पेड़ हैं
मंदिर इसी पर खड़े
मस्जिद इस पर बनी
गुरुद्वारे-चर्च भी रेत पर
घर भी बनाये हैं लोगों ने रेत पर
सपने भी बुने हैं लोगों ने रेत पर
हवा जब बहती है तेज रेत भी उड़ती है
रेत पर लहराता जीवन संवरता रहता
नश्वर यह संसार रेत में ही मिल जाता
रेत का ही जीवन है