रंगा के नाट्य लेखन पर तिवाड़ी का कहना था कि उनके द्वारा लिखित नाटक राष्ट्रीय स्तर के है, इनका मंचन किया जाना एवं रंगा के सृजित साहित्य के संचयन को प्रकाशित करने की आवश्यकता है।
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लेखक को साहित्य रचते समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है- मालचंद तिवाड़ी
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लेखक को साहित्य रचते समय कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है- मालचंद तिवाड़ी
बीकानेर 19 अक्टूबर 2026 सोमवार
‘‘लक्ष्मीनारायण रंगा रचना संचार -साहित्य, शिक्षा एवं रंगकर्म’’ विषय पर संवाद का आयोजन दो दिवसीय ‘‘सृजन सौरम लक्ष्मीनारायण रंगा’’ समारोह के दूसरे और अंतिम दिवस क अनुष्ठान को विराम दिया गया। अजित फाउण्डेशन के तत्वावधान में हुए संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी ने की। तिवाड़ी ने कहा कि लेखक के सामने लिखते समय कई चुनौतियां होती है। वह अपने लेखन को किस दिशा ले जा रहा है तथा आने वाली पीढ़ी हेतु वह किस प्रकार का साहित्य रच रहा है। इस चुनौती को लक्ष्मीनारायण रंगा ने बखूबी निभाया। रंगा ने अपने रचना संसार में सभी विधाओं पर कलम चलाते हुए नवांकुरों हेतु अवसर प्रदान किए। रंगा के नाट्य लेखन पर तिवाड़ी का कहना था कि उनके द्वारा लिखित नाटक राष्ट्रीय स्तर के है, इनका मंचन किया जाना एवं रंगा के सृजित साहित्य के संचयन को प्रकाशित करने की आवश्यकता है।
संवाद के मुख्य वक्ता साहित्यकार हरीश बी. शर्मा ने लक्ष्मीनारायण रंगा से अपने जुड़ाव के पलों का स्मरण करवाया तथा रंगा को सदैव रचनाकार को आगे बढ़ने को प्रेरित करने व मार्गदर्शन करने वाला बताया। हरीश ने कहा कि रंगा ने साहित्य सृजन में लोकतंत्र की स्थापना की। उन्होंने अभिव्यक्ति की पैरवी की तथा सृजनात्मक लेखक के पक्षधर रहे। लक्ष्मीनारायण रंगा के नाट्य लैखन को रेखांकित करते हरीश ने कहा कि ‘पूर्णमिद्म’ एवं ‘सुमंगळी माधवी’ बहुत प्रसिद्ध नाटक हुए। जिसमें उन्होंने महाभारत के कथानक को लेकर आधुनिक नाटक से जोड़ा। हरीश वीर शर्मा ने राजस्थानी भाषा की मान्यता संबंधित लक्ष्मी नारायण रंगा के प्रयासों को याद दिलाया और कहा कि वे राजस्थानी को राजभाषा का दर्जा दिलाने की मांग करते हुए निरन्तर लेखन तथा सरकार से पत्राचार करते रहे।
कार्यक्रम संयोजन राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार कमल रंगा ने कहा कि अजित फाउण्डेशन द्वारा इस तरह के आयोजन से ही हम कीर्तिशेष साहित्यकारों को नवपीढी तक पहुंचा सकते है। उन्होंने विश्वास दियाला कि लक्ष्मीनारायण रंगा के साहित्य को ‘संचयन’ के रूप में प्रकाशन हेतु हर संभव प्रयास किए जाएगें।
इस अवसर पर जुगलकिशोर पुरोहित, नरसिंह बिन्नानी, मोहम्मद फारूक, इसरार हसन कादरी, सुनील बोड़ा, गौरीश्ंाकर प्रजापत, डॉ. नीतिन गोयल आदि ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम का संचालन संस्था समन्वयक संजय श्रीमाली ने किया । कार्यक्रम के अंत में आभार साहित्यकार गिरिराज पारीक ने ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में डॉ. अजय जोशी, कासीम बीकानेरी, मनीष जोशी, हनीफ उस्ता, राजेन्द्र जोशी, ओम प्रकाश सुथार, संजय आचार्य, आनन्द छंगाणी, राजेश रंगा, शिवप्रकाश शर्मा, हरि शंकर आचार्य, महेन्द्र पुरोहित सहित गण्यमान्य साक्षी रहे।





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