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जन्म से पूर्व से जीवन के अंत तक महिलाओं के लिए कानून - डाॅ.कमल दत्त

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जन्म से पूर्व से जीवन के अंत तक महिलाओं के लिए कानून - डाॅ.कमल दत्त
बीकानेर, 8 मार्च। स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष डाॅ.कमल दत्त ने कहा है कि महिलाओं के जन्म से पूर्व गर्भ के समय से अंत समय तक के  कानून बने हुए है। महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण व स्वावलम्बन में कानून से अधिक परिवारिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक  संरक्षण, संस्कार व सम्मान का बोध प्रभावी व कारगर होता है।
डाॅ.कमल दत्त शुक्रवार को सूचना केन्द्र में नव भारती महिला प्रशिक्षण संस्थान व सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में महिला दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहीं थी। उन्होंने कहा कि दृढ़ ईच्छा शक्ति से छोटे-से छोटा कार्य कर महिलाएं स्वावलम्बी बन सकती है। शिक्षा का मतलब केवल किताबी ज्ञान न होकर अपने में व्याप्त सहनशीलता, सेवा,धैर्य, अच्छे संस्कार व विचारों को उजागर कर आत्म निर्भर व शक्तिशाली बनना है। अनादिकाल से देवी व अन्य रूपों में सम्मानीय व पूजनीय तथा समाज की मुख्य धु्ररी रही है। महिलाएं अपनी बाहरी की बजाएं आंतरिक शक्ति व बाहरी सौन्दर्य को अच्छे गुणों के माध्यम विकसित करें। हर काल व परिस्थिति में अभिमान को त्याग कर नम्रता से समझदारी से कार्य करें। कभी भी पाश्चात्य प्रभाव में नहीं आकर  अपनी संस्कृति, वेशभूषा व श्रेष्ठ परम्पराओं को नहीं छोड़े।  उन्होंने बाल विवाह व अन्य महिला सुरक्षा के कानून, स्थाई लोक अदालत के बारे में भी जानकारी दी तथा युवतियों की जिज्ञासाओं को दूर किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए काॅलेज शिक्षा की पूर्व उप निदेशक डाॅ.सरस्वती बिश्नोई ने कविता के माध्यम से कहा कि युवतियां स्वयं अनुशासित, शिक्षित व संस्कारित बने कर प्रेम, विश्वास व सहयोग की भावना के साथ परिवार व समाज को आगे बढ़ाने में अपने सामथ्र्य व शक्ति को लगावें।
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की क्षेत्रीय प्रभारी बी.के.कमल ने कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय 83 वर्षों विश्व में महिलाओं द्वारा संचालित सबसे बड़ी आध्यात्मिक संस्था है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने में व्याप्त दुर्गुणों का त्यागकर सद्गुणों, नैतिकता, सद्विचारों को अपनाकर समाज में परिवर्तन कर सकती है।  नारी रूप में शक्ति, सेवा, भक्ति,श्रद्धा, विश्वास, आशा, मर्यादा, लज्जा, सौन्दर्य, क्षमा, ़िवद्या है। वह बेटी, बहिन, मां व पत्नी के रूप में वात्सल्य, प्रेम, सेवा और समर्पण को प्रकट करती है। नारी को सम्मान देने वाले परिवार व समाज में सुख, शांति व समृद्धि रहती है।
मुख्य वक्ता महारानी सुदर्शन महाविद्यालय की प्राध्यापक डाॅ.नूरजहां कादरी ने कहा कि पुरुष व महिलाओं में व्याप्त लैंगिक भेद को दूर करने में युवतियां सजगता से कार्य करें। अपने कार्य, व्यवहार को उत्तम बनावें तथा अधिकाधिक शिक्षित बनें तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें।  शिक्षा के उजयारे से ही सामाजिक कुरीतियां व समस्याएं दूर हो सकती है। दयानंद पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य आशिमा गांधी ने कहा कि महिलाएं  शिक्षा के साथ भाव व विचारों को उतम बनाकर सक्षम व समर्थ बनें।  नव भारती महिला प्रशिक्षण संस्थान की अध्यक्ष श्रीमती अनुपम तिवारी ने बताया कि संस्थान ने अब तक 25 हजार से अधिक युवतियों को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई व कुकिंग आदि का प्रशिक्षण दिया है इनमें करीब 10 हजार महिलाएं वर्तमान में प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार से जुड़ी है। उल्लेखनीय व दीर्धकालीन शैक्षणिक, सामाजिक सेवाओं पर समारोह में डाॅ.शुक्ला बाला पुरोहित, डाॅ.सरस्वती बिश्नोई, सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग की सहायक जन सम्पर्क अधिकारी भाग्यश्री गोदारा, आशिमा गांधी, महारानी सुदर्शन महाविद्यालय की उप प्राचार्या डाॅ.पुष्पा चैहान व प्राध्यापक डाॅ.नूरजहां कादरी का शाॅल व स्मृति चिन्ह से सम्मान किया गया। इस अवसर पर अतिथियों ने संस्थान में फैशन डिजाइन का प्रशिक्षण लेने वाली युवतियों को प्रमाण पत्र और देशनोक की सुश्री उर्मिला भूरा को सिलाई मशीन प्रदान कर सम्मानित किया।  संस्थान की सचिव लता गोयल, के अंजनी तिवारी, बी.के. मीना,   सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी शिव कुमार सोनी ने भी विचार व्यक्त किए।



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1 Comments

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