साजिश और सादगी

साजिश और सादगी 

साजिश  में  मशगूल /
साजिशी  को  फुर्सत  नहीं  थी /
सज्जन  साजगिरी  गुंजाता /
सादगी  से  'पार ' पहुँच  गया...
......( दूसरो को भटकाने वाला अपने ही
लक्ष्य से भटक जाता है और  कभी मंजिल तक नहीं पहुचता जबकि अपने काम से काम रखते
हुव़े लगातार लक्ष्य की ओर बढ़ने वाले को निश्चय ही मंजिल मिल जाती है...)

Comments

Popular posts from this blog

सेवानिवृत्ति के अवसर पर भी दिया मतदान जागरूकता का संदेश

वीडियो : भाजपा प्रत्याशी दीपक पारीक के चुनाव कार्यालय का उद्घाटन

वार्ड 73 में भाजपा को मिला एक अन्य प्रत्याशी का महत्वपूर्ण समर्थन,