विदा होकर भी रोशनी की उम्मीद दे गईं विमला मेहरा, परिजनों ने पूरा किया नेत्रदान का संकल्प

निधन के बाद पीबीएम अस्पताल में हुआ नेत्रदान, शोक के बीच परिवार ने दिया मानव सेवा का संदेश

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विदा होकर भी रोशनी की उम्मीद दे गईं विमला मेहरा, परिजनों ने पूरा किया नेत्रदान का संकल्प
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विदा होकर भी रोशनी की उम्मीद दे गईं विमला मेहरा, परिजनों ने पूरा किया नेत्रदान का संकल्प

निधन के बाद पीबीएम अस्पताल में हुआ नेत्रदान, शोक के बीच परिवार ने दिया मानव सेवा का संदेश

    बीकानेर। जीवन के बाद भी दूसरों के जीवन में उजाला लाने की भावना को साकार करते हुए श्रीमती विमला मेहरा का मरणोपरांत नेत्रदान किया गया। सिद्धार्थ मेहरा की धर्मपत्नी विमला मेहरा का बुधवार को निधन हो गया था। उनकी इच्छा और संकल्प का सम्मान करते हुए परिजनों ने पीबीएम अस्पताल में नेत्रदान करवाया।

    पीबीएम अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ सीताराम गोठवाल ने बताया कि विमला मेहरा ने अपने जीवनकाल में नेत्रदान की इच्छा व्यक्त की थी। उनके निधन के बाद परिवार ने गहरे दुःख के बीच इस संकल्प को पूरा करने का निर्णय लिया। सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के विज्ञान विभाग से संबद्ध पटेल नेत्र कोष के स्वीकृति पत्र में उनकी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा ने अपनी माता के नेत्रदान की सहमति दी। इस निर्णय से जरूरतमंदों के जीवन में दृष्टि की नई उम्मीद जगी है।

बीकानेर से गहरा रिश्ता 

      विमला मेहरा के मामा डॉ सीताराम गोठवाल पीबीएम अस्पताल के पूर्व अधीक्षक तथा सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभागाध्यक्ष रहे हैं । बड़ी पुत्री डॉ. मनीषा मेहरा,बीकानेर स्थित राजुवास कॉलेज में प्रोफेसर, दामाद डॉ. ओमप्रकाश सिंह स प मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभाग में असोसिएट प्रोफेसर हैं। चिड़ावा (झुंझनू) निवासी विमला मेहरा की छोटी पुत्री डॉ. शशि मेहरा सीकर , डॉ. सुरेन्द्र कुमार, कुचामन में कार्यरत हैं। परिवार ने विमला मेहरा की अंतिम इच्छा को सम्मान देते हुए नेत्रदान के माध्यम से समाज के सामने संवेदनशीलता और सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया।

*पारिवारिक दुःख के बीच मानवता के प्रति समर्पण*

परिवार लगभग दस वर्ष पूर्व अपने पुत्र इंजीनियर शिवनाथ मेहरा को सड़क दुर्घटना में खो चुका है। इस गहरे पारिवारिक आघात के बावजूद विमला मेहरा का नेत्रदान का संकल्प और उसे पूरा करने का परिजनों का निर्णय मानवीय संवेदनाओं के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता ।

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