निशानेबाजी में बीकानेर फिर परचम फहराएगा सादुल क्लब, बीकानेर ने यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज स्थापित की
इस शूटिंग रेंज में ओलंपिक स्तर की मशीन लगाई जा रही है और यहां वही सब मापदंड अपनाए जा रहें हैं, जो ओलम्पिक खेलों के लिए अनिवार्य है
औरों से हटकर सबसे मिलकर
निशानेबाजी में बीकानेर फिर परचम फहराएगा
सादुल क्लब, बीकानेर ने यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज स्थापित की
Affiliate Disclaimer : "नोट: इस पोस्ट में कुछ एफिलिएट लिंक्स शामिल हैं। अगर आप इन पर क्लिक करके कुछ खरीदते हैं, तो मुझे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के छोटा सा कमीशन मिल सकता है।" - मोहन थानवी (खबरों में बीकानेर) औरों से हटकर सबसे मिलकर
https://bahubhashi.blogspot.com
https://bahubhashi.blogspot.com
निशानेबाजी में बीकानेर फिर परचम फहराएगा
सादुल क्लब, बीकानेर ने यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज स्थापित की
बीकानेर। निशानेबाजी में बीकानेर फिर परचम फहराएगा। सादुल क्लब, बीकानेर ने यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज स्थापित की है। सादुल क्लब परिसर में स्थापित इस शूटिंग रेंज में निशानेबाजों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग और माहौल मिलेगा। शूटिंग रेंज स्थापित करने में लगभग सात करोड़ रुपए की लागत आएगी।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए क्लब के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ और सचिव एम.पी. सिंह सोइन ने बताया कि इस शूटिंग रेंज में ओलंपिक स्तर की मशीन लगाई जा रही है और यहां वही सब मापदंड अपनाएं जा रहें हैं, जो ओलम्पिक खेलों के लिए अनिवार्य है। लॉस एंजेलिस में होने वाले ओलंपिक-2028 में पदक जीतने के लिए एक शूटिंग रेंज में निशानेबाजों को जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक चाहिए, वो सभी उपलब्ध करवाई जा रही है। इस स्तर की मशीनें पूरे भारत में सिर्फ बीकानेर लगाई जा रही है। सादुल क्लब बीकानेर की शूटिंग रेंज पूरे भारत में एकमात्र शूटिंग रेंज होगी, जहां विश्वस्तरीय निशानेबाजों की प्रतिस्पर्धा और ओलम्पिक खेलों के स्तर को ध्यान में रखते हुए तकनीकी उपलब्ध करवाई जाएगी।
इस मौके पर उपस्थित युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने लाइव डेमो भी दिया। सिंगल ट्रेप-डबल ट्रेप उड़ाकर वहां उपस्थित सभी लोगों का ध्यान खींच लिया।
उन्होंने बताया कि अभी कुल 17 मशीन लगाई गई है, जिसमें 15 ट्रैप स्पर्धा और दो स्कीट स्पर्धा के लिए है। ये मशीनें इंग्लैंड की प्रोमेटिक कंपनी से मंगवाई गई है और इनको स्थापित करने के लिए इंग्लैंड से दो इंजीनियर भी आए हैं। इंग्लैंड से आए इंजीनियर केविन और जोस इन मशीनों को स्थापित करने के लिए दिन रात जुटे हुए हैं।
राठौड़ ने बताया कि रियासतकालीन जमाने में महाराजा करणी सिंह और उनकी पुत्री राज्यश्री कुमारी ने निशानेबाजी में परचम लहराया था। निशानेबाजी की इन उपलब्धियों पर डा. करणी सिंह को 1961 में और राज्यश्री कुमारी को 1969 में अर्जुन अवार्ड प्रदान किया गया था। साथ ही राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने ओलंपिक और अपूर्वी चंदेला ने राष्ट्रमंडल खेलों व विश्व कप निशानेबाजी में नाम कमाया है। इसी प्रकार उभरते युवा निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने भी बीकानेर का मान बढ़ाया है।
हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे बीकानेर और भारत का नाम रोशन करें। तकनीकी रूप से उन्हें कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। ट्रेनिंग के लिए देश के स्तरीय कोच की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पड़ने पर विदेशी कोच को भी बुलाएंगे।
उन्होंने बताया कि इस शूटिंग रेंज का अवलोकन करने के लिए नेशनल राइफल एसोसिएशन के तकनीकी पदाधिकारी यहां आएंगे। वे इस रेंज का तकनीक रूप से गहन परीक्षण करेंगे और उसके बाद सादुल क्लब को एक प्रमाण पत्र जारी करेंगे। उस प्रमाण पत्र के आधार पर हम जिला प्रशासन से अनुमति प्राप्त कर ट्रेनिंग शुरू कर देंगे। निशानेबाजों को ट्रेनिंग के लिए सादुल क्लब की ओर से कुछ बंदूके भी उपलब्ध करवाई जाएगी।
सचिव सोइन ने बताया कि वर्तमान में सादुल क्लब में बास्केटबॉल, टेनिस, टेबल टेनिस, ताइक्वांडो, तीरंदाजी, क्रिकेट, पिकल बाल, बैडमिंटन, बिलियर्ड्स,तैराकी खेलों की सुविधाएं उपलब्ध हैं। क्लब में औसत रूप से लगभग 300 से 400 बच्चे अभ्यास करते हैं। क्लब में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की है। अब इस अंतरराष्ट्रीय स्तर की शूटिंग रेंज के माध्यम से हमारे बच्चे देश के लिए मैडल जीत सकेंगे। निशानेबाज उद्धव सिंह हरासर ने कहा कि विदेशों में भारत की अपेक्षा ज्यादा शूटिंग रेंज और तकनीकी सुविधा उपलब्ध है। अब बीकानेर में शूटिंग रेंज में अभ्यास के ज्यादा मौके मिलेंगे।
प्रेस वार्ता में इंग्लैंड से आए इंजीनियर केविन और जोस के साथ-साथ सादुल क्लब एक्जीक्यूटिव कार्यकारणी के सदस्य भी मौजूद थे।










Comments
Post a Comment
खबर आपकी नजर में... कमेंट करके बताएं