बीकानेर : 'मनुस्मृति: समर्थन या विरोध कितना उचित?' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी 3 अक्टूबर से होटल पाणिग्रहण में, मनुस्मृति की प्रासंगिकता पर मंथन के साथ-साथ यज्ञ प्रवचन, परिचर्चा एवं रात्रि-सत्संग भी होगा Manusmriti

देश भर के ख्यातिप्राप्त विद्वान, मनुस्मृति के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य पर गहन मंथन करेंगे

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बीकानेर : 'मनुस्मृति: समर्थन या विरोध कितना उचित?' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी 3 अक्टूबर से होटल पाणिग्रहण में, 
मनुस्मृति की प्रासंगिकता पर मंथन के साथ-साथ यज्ञ प्रवचन, परिचर्चा एवं रात्रि-सत्संग भी होगा
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बीकानेर : 'मनुस्मृति: समर्थन या विरोध कितना उचित?' विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी 3 अक्टूबर से होटल पाणिग्रहण में, 
मनुस्मृति की प्रासंगिकता पर मंथन के साथ-साथ यज्ञ प्रवचन, परिचर्चा एवं रात्रि-सत्संग भी होगा

आर्ष न्यास और वैदिक शोध संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आगामी 3 और 4 अक्टूबर 2026 को प्रत्येक दिन दो सत्रों में बीकानेर के होटल पाणिग्रहण में एक भव्य 'विद्वत् विचार गोष्ठी' का आयोजन किया जा रहा है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय 'मनुस्मृति: समर्थन या विरोध कितना उचित?' रखा गया है।
इस गोष्ठी का मुख्य प्रयोजन भारतीय समाज में मनुस्मृति को लेकर व्याप्त भ्रांतियों और अतिवाद को दूर कर एक निष्पक्ष और अकादमिक विमर्श प्रस्तुत करना है। मनुस्मृति न केवल प्राचीन भारत का प्रथम व्यवस्थित विधि-शास्त्र और आर्ष ग्रंथ है, बल्कि भारतीय संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था की ऐतिहासिक आधार भी रही है। वर्तमान में इसके कुछ अंशों को लेकर जो विरोध या अंध-समर्थन देखा जाता है, उसकी वास्तविकता को समझने के लिए इस गोष्ठी का आयोजन किया गया है।
इस गोष्ठी में देश भर के ख्यातिप्राप्त विद्वान, मनुस्मृति के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य पर गहन मंथन करेंगे। विद्वान इस बात पर प्रकाश डालेंगे कि कैसे समय-समय पर ग्रंथ में प्रक्षिप्त अंश जोड़े गए, और किस प्रकार इसके मूल मानवतावादी और वेदानुकूल सिद्धांतों को पुनः समाज के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए। विचार गोष्ठी में संपूर्ण मनुस्मृति, प्रक्षेप मानना उचित अनुचित, वर्ण व्यवस्था, दंड व्यवस्था, विवाह व्यवस्था, स्त्रियों के अधिकार आदि विषयों पर विस्तृत रूप से पक्ष-विपक्ष में विचार मंथन किया जाएगा
इस संगोष्ठी में डॉ. सुरेंद्र कुमार (गुरुग्राम), आचार्य रविन्द्र (हमीरपुर), मुनि सत्यजित् (रोजड़), डॉ. सुधीर आर्य (जे.एन.यू., दिल्ली), आचार्य शीतल (रोजड़), डॉ. शिवलोचन शाण्डिल्य (बी.एच.यू.), आचार्य हरिप्रसाद (हैदराबाद), आचार्य रविशंकर (बयाना), डॉ. दीपक आर्य (रोजड़), श्री उत्कर्ष आर्य (कानपुर), श्री आर्यन आचार्य (रोहतक) और प्रो. शत्रुंजय रावत (आई.आई.आई.टी. हैदराबाद) डाॅ.नंदिता सिंघवी (बीकानेर), श्री केसरमल (फलोदी), डॉ. चंचल पाठक (बीकानेर) जैसे मूर्धन्य विद्वान अपने व्याख्यान देंगे।
कार्यक्रम में यज्ञ प्रवचन, परिचर्चा एवं रात्रि-सत्संग का भी आयोजन किया गया है। यह आयोजन पर्यावरण पोषण यज्ञ समिति बीकानेर के सौजन्य से संपन्न होगा। कार्यक्रम में आयोजकों ने बीकानेर के गणमान्य व्यक्तियों, धर्मप्रेमी नागरिकों और जिज्ञासुओं से इस विचार गोष्ठी का लाभ अधिक से अधिक संख्या में लेने का आग्रह किया है।

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