“राजस्थान की मरु संस्कृति- विरासत, यात्रा-पर्यटन एवं वैश्विक आकर्षण” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया
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बीकानेर की विरासत को मिले यूनेस्को विश्व विरासत सूची में स्थान’’ प्रो. जैदी
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बीकानेर की विरासत को मिले यूनेस्को विश्व विरासत सूची में स्थान’’ प्रो. जैदी
बीकानेर, 27 सितम्बर। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन दिवस के अवसर पर राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, बीकानेर में “राजस्थान की मरु संस्कृति- विरासत, यात्रा-पर्यटन एवं वैश्विक आकर्षण” विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, बीकानेर में आयोजित यह कार्यक्रम पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग, बीकानेर तथा महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में “सुनी, लिखी, पढ़ी व्याख्यान श्रृंखला” के अंतर्गत आयोजित हुआ।
व्याख्यान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पर्यटन, होटल, हॉस्पिटैलिटी एवं हेरिटेज स्टडीज विभाग के पूर्व समन्वयक प्रो. सै. जैदी मुख्य वक्ता रहे।
प्रो. जैदी ने पर्यटन और इतिहास के अंतर्संबंधों पर केंद्रित व्याख्यान देते हुए दोनों क्षेत्रों के विविध पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने 12वीं शताब्दी के साहित्यिक स्रोतों का उल्लेख करते हुए भारत में सदियों पुरानी यात्रा एवं पर्यटन परंपरा के ऐतिहासिक विकास पर प्रकाश डाला।
प्रो. जैदी ने कहा कि राजस्थान की मरु संस्कृति अपनी विशिष्ट परंपराओं, जीवन-पद्धति और सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण देश ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी विशिष्ट पहचान रखती है। बीकानेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का उल्लेख करते हुए गजनेर, लक्ष्मीनाथ, लालगढ़, करणी माता कैमल फार्म और सागर छतरियों को महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के रूप में रेखांकित किया गया। इन स्थलों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विशेषताओं को पर्यटन विकास से जोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
बीकानेर की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में स्थान दिलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। उन्होंने यात्रा-पर्यटन को वैश्विक उद्योग बताते हुए कहा कि पर्यटन के विभिन्न आयामों को समझने तथा उन्हें प्रभावी ढंग से विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने पर्यटन के विकास में उद्यमियों की भूमिका, नीतिगत प्रयासों तथा स्थानीय संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने पर भी प्रकाश डाला।
युवा उद्यमी आशीष अग्रवाल ने बीकानेर के विशिष्ट खान-पान को शहर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए फूड टूरिज्म के विकास में इसकी भूमिका को रेखांकित किया।
विश्व पर्यटन दिवस 2026 की आधिकारिक थीम “डिजिटल एजेंडा और पर्यटन को नए रूप में ढालने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता”के संदर्भ में उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने विशेष रूप से डेजर्ट टूरिज्म को बढ़ावा देने तथा राजस्थान की मरु संस्कृति को पर्यटन की दृष्टि से और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की आवश्यकता बताई।
वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी, डॉ. नितिन गोयल ने कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए आयोजन के उद्देश्य और बीकानेर की विरासत एवं पर्यटन के महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र कुमार और राकेश शर्मा, संग्रहालयाध्यक्ष की प्रमुख भूमिका रही।कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मोनिका गौड़ ने किया। कार्यक्रम में कर्नल हेम सिंह, डॉ. मेघना शर्मा, डॉ. गिरिजा शंकर ओझा, डॉ. नासिर जैदी, राजाराम स्वर्णकार, अजय जोशी, राजेन्द्र जोशी, उमेश शर्मा, प्रेरणा महेश्वरी, नंदिनी अग्रवाल सहित शोधार्थी, इतिहास एवं संस्कृति के गणमान्य अध्येता उपस्थित रहे।




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