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Showing posts from September, 2016

राजस्थानी भाषा और साहित्य सम्बन्धी वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा

भाटी ने किया बीकानेर देहात भाजपा अध्यक्ष पद पर दुसाद की नियुक्ति का विरोध

राजस्थानी डाइजेस्ट: बुलाकी शर्मा का राजस्थानी कहानी संग्रह “मरदजात अर ...

सात तालों में बंद चेहरों का आईना

० मोहन थानवी, बीकानेर

चार दशक से साहित्य के वृहद केनवास पर अहसास और अनुभवों को शब्दाकार देने वाले कथाकार, व्यंग्यकार, नाटककार बुलाकी शर्मा की कृति “मरदजात अर दूजी कहाणियां” के पात्र अंतर-आत्मा के भी अंतःस्थल को सामने ले आते हैं। कहानियों में समाज और परिवेश के वे पहलू भी रेखांकित होते जाते हैं जो राजस्थानी कहानियों में अब तक प्रायः ओझल रहे हैं। ऐसा शिल्प कवि-मन उकेर सकता है। बुलाकी जी काव्य-विधा को गूढ़ और स्वयं के लिए असाध्य मानते हैं। लेकिन उन्होंने कविताएं लिखी भी हैं, जिन्हें वे कविता नहीं मानते व कहते हैं इसलिए पाठकों तक नहीं पहुंचाई। बुलाकी जी का कहानी संग्रह “मरदजात अर दूजी कहानियां” कथा-शिल्प की बेजोड़ नजीर है।

यूं राजस्थानी साहित्य जगत में कहानी का क्षेत्र विस्तृत रहा है। नई कहानी के शिल्प में कतिपय ऐसी रचनाएं भी रही हैं जिनमें लोक कथाओं के सूत्र भी मिल जाते हैं। लेकिन राजस्थानी कहानी के परंपरागत स्वरूप से इतर यदि आधुनिक राजस्थानी कहानियों के गठन और कथा-परिवेश की तारतम्यता को विगत तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जानना समझना हो तो बुलाकी जी की कहानिय…