Thursday, February 7, 2013

फिर से बचपन पा जाना...


फिर से बचपन पा जाना...

फिर से बचपन पा जाना...
होंठों पर टपकी
बरसात की बूंदों को
अपने में
समेट लेना
बादल
संग उड़कर
दामिनी संग
नृत्य करना
पंछियों के पंख
उधार
मांग कर
हवाओं का ऋण
चुकाना
कागज़ की नाव को
सड़क किनारे
उफनती सरिता की
लहरों पर छोड़ना
धोरों के बीच
*रेशम - सी लाल डोकरी*
खोजना
और
हथेली में
सहेज कर
स्कूल में
*धाक*
जमाना...
कितना अच्छा
लगता है / फिर से बचपन पा जाना...