किसानों के लिए मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग करने पर होगी कठोर कानूनी कार्रवाई, दोषी अधिकारियों की भी तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तीन माह से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान, अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहन भी होंगे जब्त
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अनुदानित यूरिया-डीएपी की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और औद्योगिक उपयोग पर राजस्थान सरकार का बड़ा प्रहार
किसानों के लिए मिलने वाली सब्सिडी वाली खाद का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग करने पर होगी कठोर कानूनी कार्रवाई, दोषी अधिकारियों की भी तय होगी व्यक्तिगत जवाबदेही
आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत तीन माह से सात वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान, अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहन भी होंगे जब्त
जयपुर/बीकानेर, 4 नवंबर। किसानों के हितों की रक्षा और उन्हें रियायती दरों पर पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए राजस्थान सरकार ने अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के दुरुपयोग, कालाबाजारी, अवैध भंडारण, जमाखोरी तथा औद्योगिक इकाइयों की ओर डायवर्जन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाया है। कृषि आयुक्तालय ने इस संबंध में प्रदेशभर के लिए कड़े निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले उर्वरकों का गैर-कृषि कार्यों में उपयोग किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी अनियमितताओं में संलिप्त व्यक्तियों के साथ-साथ कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि भारत सरकार द्वारा किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यूरिया के प्रति बैग पर लगभग 2,700 रुपये तथा डीएपी के प्रति बैग पर लगभग 3,500 रुपये तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है। इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य किसानों की खेती की लागत कम करना, उन्हें आर्थिक राहत देना और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना है। ऐसे में अनुदानित उर्वरकों का औद्योगिक या अन्य गैर-कृषि कार्यों में उपयोग करना किसानों के हितों के साथ धोखा और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है।
*कालाबाजारी करने वालों को तीन माह से सात वर्ष तक की सजा*
कृषि आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत उर्वरकों को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखा गया है। अधिनियम की धारा 7 के अंतर्गत उल्लंघन के मामलों में तीन माह से सात वर्ष तक के कारावास एवं जुर्माने का प्रावधान है। वहीं धारा 10 के तहत दोषी कंपनियों के साथ उनके जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहनों को नियमानुसार जब्त करने का भी प्रावधान है।
सभी उर्वरक निर्माता एवं विपणन कंपनियों, थोक एवं खुदरा विक्रेताओं तथा यूरिया का उपयोग करने वाली औद्योगिक इकाइयों को निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अनुदानित कृषि ग्रेड यूरिया एवं डीएपी की अवैध बिक्री, डायवर्जन, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री अथवा गैर-कृषि उपयोग पाए जाने पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
*औद्योगिक इकाइयों को हर महीने देना होगा खरीद एवं उत्पादन का विवरण*
राज्य सरकार ने यूरिया के गैर-कृषि उपयोग पर निगरानी मजबूत करने के लिए औद्योगिक इकाइयों की जवाबदेही भी निर्धारित की है। औद्योगिक, प्लाईवुड, रेजिन, पशु आहार तथा अन्य गैर-कृषि इकाइयों द्वारा यूरिया का उपयोग किए जाने पर उन्हें प्रत्येक माह गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद तथा उससे संबंधित उत्पादन का विवरण विभागीय अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा।
इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि औद्योगिक इकाइयां केवल नियमानुसार प्राप्त गैर-अनुदानित यूरिया का ही उपयोग करें तथा किसानों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले उर्वरकों का औद्योगिक गतिविधियों में दुरुपयोग न हो।
*लापरवाह कृषि अधिकारियों की भी तय होगी व्यक्तिगत जिम्मेदारी*
कृषि आयुक्तालय द्वारा जारी निर्देशों में अधिकारियों की जवाबदेही को भी विशेष महत्व दिया गया है। अनुदानित यूरिया एवं डीएपी के गैर-कृषि उपयोग, कालाबाजारी, अवैध भंडारण, डायवर्जन अथवा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री की शिकायत या अनियमितता सामने आने पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध तत्काल नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।
यदि ऐसी अनियमितताएं सामने आने के बावजूद संबंधित कृषि अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। इस व्यवस्था से उर्वरक वितरण एवं निगरानी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
*कालाबाजारी की सूचना देने वालों को मिलेगा नकद प्रोत्साहन*
उर्वरकों की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार की मुखबिर योजना भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योजना के तहत उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध परिवहन, जमाखोरी एवं डायवर्जन की प्रमाणिक सूचना देने वाले व्यक्तियों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार नकद प्रोत्साहन अथवा इनाम राशि प्रदान की जाएगी।
इससे किसानों, आम नागरिकों और जागरूक व्यक्तियों की भागीदारी बढ़ेगी तथा अवैध गतिविधियों की जानकारी समय पर विभाग तक पहुंच सकेगी।
*रबी सीजन में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता*
राज्य सरकार का उद्देश्य केवल अनियमितताओं पर कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप यूरिया एवं डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। विशेषकर रबी बुवाई के महत्वपूर्ण समय में उर्वरकों का सही वितरण बेहद आवश्यक है। अनुदानित उर्वरकों के गैर-कृषि उपयोग और अवैध डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण से वास्तविक किसानों के लिए खाद की उपलब्धता सुरक्षित रहेगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी।
कृषि विभाग ने सभी उर्वरक कंपनियों, विक्रेताओं, औद्योगिक इकाइयों एवं संबंधित अधिकारियों को जारी निर्देशों की तत्काल प्रभाव से पालना सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से जुड़े इस विषय में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार की प्राथमिकता है कि किसानों के लिए निर्धारित सरकारी अनुदान का वास्तविक लाभ उन्हीं तक पहुंचे और उन्हें समय पर उचित दर पर खाद उपलब्ध हो।



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