34 वी पुण्यतिथि पर जयनारायण व्यास कॉलोनी में "राजस्थान की लोकगायिका पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के मांड लोकगीतों" पर चर्चा का आयोजन किया गया
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पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की विरासत को चिरस्थाई बनाने और मांड गीतों के समुचित संरक्षण का आह्वान
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34 वी पुण्यतिथि पर पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की विरासत को चिरस्थाई बनाने और मांड गीतों के समुचित संरक्षण का आह्वान
बीकानेर 3 नवम्बर। मांड कोकिला पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई की 34 वी पुण्यतिथि पर जयनारायण व्यास कॉलोनी में "राजस्थान की लोकगायिका पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई के मांड लोकगीतों" पर चर्चा का आयोजन किया गया । चर्चा में वक्ताओं ने स्व अल्लाह जिलाई बाई की विरासत और स्मृतियों को चिरस्थाई बनाने और मांड गीतों के समुचित संरक्षण का आव्हान किया ।
अल्लाह जिलाई बाई मांड गायिकी प्रशिक्षण संस्थान के प्रबंध निदेशक डॉ0 अजीज अहमद सुलेमानी ने कहा कि जाईमां अल्लाह जिलाई बाई राजस्थान के लोकसंगीत के प्रति समर्पित कलाकार थी जिनके मन में मानवीय संवेदना थी ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कवि कथाकार संस्कृतिकर्मी राजेंद्र जोशी ने कहा कि अल्लाह जिलाई बाई और मांड गायिकी एक दूसरे के पर्याय है जिनके गीतों में लोक चेतना के स्वर है ।
मुख्य वक्ता सेंटर फॉर केटेलाइजिंग चेंज (सी - 3) शिक्षा, नई दिल्ली की पहल प्रमुख शबनम अज़ीज़ ने कहा स्व अल्लाह जिलाई बाई के गीतों में नारी मन की सशक्त अभिव्यक्ति है ।
कार्यक्रम में गीतकार कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने स्व अल्लाह जिलाई बाई के सम्मान में अपनी राजस्थानी काव्य रचना - "आखै जग में अल्लाह जिलाई बाई माड नै गायी /जाईमां संगीत रे सात सुरां में आपरी पिछाण बणाई,/माड राग गायिका बीकाणै री इण धरा धाम पर आई/पधारो म्हारे देश, केसरिया बालम सूं इतिहास रचाई ।" - प्रस्तुत की।
कार्यक्रम संयोजक वरिष्ठ लेखक अशफाक कादरी ने कहा कि पद्मश्री अल्लाह जिलाई बाई ने अपने जीवनकाल में राजदरबार, महफिलों, आकाशवाणी, दूरदर्शन, ग्रामोफोन रिकॉर्ड, कैसेट, राष्ट्रीय मंचों पर आम आवाम के समक्ष कार्यक्रम प्रस्तुत किए । उन्होंने कहा कि स्व अल्लाह जिलाई बाई की स्मृति में जूनागढ़ से प्रारंभ हुआ मांड की यात्रा गत 33 वर्षों में जन जन तक पहुंची है ।
फिल्मकार मंजूर अली चंदवानी ने कहा कि स्व अल्लाह जिलाई बाई के मन में मानवीय संवेदना थी ।
डॉ हनुमान सिंह कस्वां ने कहा कि स्व अल्लाह जिलाई बाई की स्मृतियों और विरासत को संजोए रखना सार्थक श्रद्धांजलि है । डॉ एस एन हर्ष, डॉ बाघ सिंह, डॉ एम एम बागड़ी, डॉ धनपत कोचर, रजिया बेग़म, अयाज़ अजीज, माही अयाज़, अब्दुल वाहिद सहित परिवार के गणमान्य उपस्थित थे ।
देश विदेश के संगीत प्रेमियों के लिए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया ।
इससे पूर्व बड़े कब्रिस्तान में अल्लाह जिलाई बाई के मजार पर कुरआनखानी और पुष्पांजलि अर्पित की गई ।
स्व अल्लाह जिलाई बाई की स्मृति में आकाशवाणी से विशेष प्रसारण
स्व अल्लाह जिलाई बाई की स्मृति में आकाशवाणी से विशेष कार्यक्रम "रेडियो का सफरनामा" में उनके लोकगीतों, स्मृतियों को साझा किया गया । स्व अल्लाह जिलाई बाई आकाशवाणी की उच्च श्रेणी की लोक कलाकार थी ।




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