दूरदर्शी नेतृत्व, जनकल्याण और आधुनिक बीकानेर के विकास में उनके योगदान को किया याद
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महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में महाराजा गंगा सिंह जी की 146वीं जयंती पर विशेष व्याख्यान आयोजित
दूरदर्शी नेतृत्व, जनकल्याण और आधुनिक बीकानेर के विकास में उनके योगदान को किया याद
बीकानेर, 12 अक्टूबर। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में आधुनिक बीकानेर के निर्माता महाराजा गंगा सिंह जी की 146वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार को महर्षि कण्व भवन स्थित सभागार में समारोह एवं विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाराजा गंगा सिंह जी के दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता, जनकल्याणकारी कार्यों, शिक्षा के प्रति दृष्टिकोण तथा बीकानेर के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास में उनके ऐतिहासिक योगदान को स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में बीकानेर के पूर्व राजपरिवार की श्रीमती राज्यश्री कुमारी मुख्य अतिथि तथा प्रख्यात विद्वान श्री जानकी नारायण श्रीमाली मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने की। यूनिवर्सिटी के मीडिया प्रभारी डॉ. उमेश शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. प्रभुदान चारण ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन और कार्यों का अध्ययन नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने के साथ ही समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराता है।
मुख्य अतिथि श्रीमती राज्यश्री कुमारी ने अपने संबोधन में महाराजा गंगा सिंह जी के जीवन से जुड़े आत्मीय एवं कम चर्चित प्रसंग साझा किए। उन्होंने उनके व्यक्तित्व, कार्यशैली, मानवीय संवेदनाओं और दूरदर्शिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व को समझने के लिए उसकी उपलब्धियों के साथ-साथ उसके विचारों, व्यवहार और जीवन से जुड़े प्रसंगों को जानना भी आवश्यक है। उनके संस्मरणों ने उपस्थित विद्यार्थियों एवं अन्य लोगों को महाराजा गंगा सिंह जी के व्यक्तित्व को निकटता से समझने का अवसर प्रदान किया।
मुख्य वक्ता श्री जानकी नारायण जी श्रीमाली ने अपने व्याख्यान में महाराजा गंगा सिंह जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न ऐतिहासिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महाराजा गंगा सिंह जी केवल एक शासक ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी प्रशासक, कुशल कूटनीतिज्ञ और जनकल्याण के प्रति समर्पित नेतृत्वकर्ता थे। उनकी विकासपरक नीतियों और आधुनिक दृष्टिकोण ने बीकानेर राज्य को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने प्रशासनिक कौशल, आधुनिक संस्थाओं के विकास, शिक्षा, सामाजिक उन्नति तथा जनहित से जुड़े कार्यों में उनके योगदान को रेखांकित किया।
श्री श्रीमाली ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह जी की दूरदर्शिता और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का अध्ययन आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का मूल्यांकन तथ्यों, दस्तावेजों और व्यापक सामाजिक संदर्भों के आधार पर करें तथा इतिहास से प्राप्त प्रेरणा को वर्तमान की चुनौतियों के समाधान में उपयोग करें।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह जी का जीवन दूरदर्शी नेतृत्व, प्रशासनिक दक्षता, विकास के प्रति प्रतिबद्धता और जनकल्याण की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका दृष्टिकोण आज भी समाज और क्षेत्र के विकास के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाली संस्था नहीं, बल्कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।
प्रो. बिश्नोई ने कहा कि महाराजा गंगा सिंह जी के नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय उनके आदर्शों और विकासपरक सोच से प्रेरणा लेते हुए ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार तथा सामाजिक उत्तरदायित्व को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे महाराजा गंगा सिंह जी के जीवन से प्रेरणा लेकर नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सामाजिक संवेदनशीलता विकसित करें। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत का वास्तविक सम्मान तभी संभव है, जब उससे प्राप्त मूल्यों को अपने जीवन में अपनाकर समाज के विकास में योगदान दिया जाए।
कार्यक्रम का संचालन सह अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संतोष कंवर शेखावत ने किया। अंत में वित्त नियंत्रक श्री देवेंद्र सिंह राठौड़ ने धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो. अनिल छंगाणी, प्रो. राजाराम चोयल, डॉ. बिट्ठल बिस्सा, डॉ. गौतम कुमार मेघवंशी, डॉ. धर्मेश हरवानी, डॉ. प्रगति सोबती, डॉ. फौजा सिंह, डॉ. मानकेशव सैनी, डॉ. उमेश शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।





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