तपस्या को भगवान की वाणी में मोक्ष मार्ग का चौथा पथ कहा गया है...

भव भव से संचित कर्मों को तोड़ने का अमोघ साधन है तपस्या...

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बीकानेर 17.09.2026

* तपस्या को भगवान की वाणी में मोक्ष मार्ग का चौथा पथ कहा गया है...

* भव भव से संचित कर्मों को तोड़ने का अमोघ साधन है तपस्या...
     
  गंगाशहर, गांधी चौक स्थित नवरंगी तप में तपस्विनी बहन श्रीमती अन्नु देवी धर्मपत्नी हनुमान मल जी बोथरा के नौ दिनों के पारणे पर *"तप अनुष्ठान सम्पूर्ति संस्कार"* में "श्री संस्कारक" धर्मेन्द्र डाकलिया के मार्गदर्शन में प्रशिक्षु मोहनलाल भन्साली ने पट्ट पर लाल वस्त्र लगाकर चावल का स्वास्तिक बनाया और मांगलिक सामग्रियों से सुसज्जित थाली में अर्हंम् को उल्लेखित किया।

       नमस्कार महामंत्र के द्वारा मंगलाचरण करते हुए *मंगल भावना पत्र* को स्थापित किया गया। जैन संस्कार विधि द्वारा आयोजित भव्य समारोह में आध्यात्मिक मंत्रोच्चार से सौम्य वातावरण प्रस्फुटित हुआ। 

       श्री संस्कारक धर्मेन्द्र डाकलिया ने मंगल भावना पत्र की महिमा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हमारा सौभाग्य है कि हमें 20 सदी के महान क्रान्तिकारी संत श्री तुलसी ने जैन धर्म के प्रभावशाली मंत्रों से युक्त "जैन संस्कार विधि" को प्रस्तुत किया। हमें मांगलिक कार्यों में सदैव आडंबरों से मुक्त और अहिंसा से रिक्त इस अमूल्य विधी को अपनाना चाहिए । इस अवसर पर उन्होंने कहा कि तपस्या को मोक्ष मारग का चौथा पथ कहा गया है और भव भव से संचित कर्मों को तोड़ने का अमोघ साधन है तपस्या ही है इसलिए हर धर्म और मजहब में तप का बहुत महत्त्व है.

      आध्यात्मिक माहौल में ऊर्जावान मंत्रों से मंत्र मुग्ध हुए आह्लादित आगंतुकों ने जैन संस्कार विधि को पीढ़ी - दर - पीढ़ी हमारे संस्कारों को प्रगाढ़ बनाने की संजीवनी बूटी बताया ।

     बोथरा परिवार से समागम जयचंद लाल जी बोथरा, मुलचंद  नाहटा, मोतीलाल छाजेड़, सुरजमल दूगड़ और 95 वर्षीय सासु मां मोहिनी देवी तथा बच्चों ने कार्यक्रम के समापन से पूर्व संस्कारको द्वारा तपस्विनी बहन को करायें जाने वाले छोटे-छोटे संकल्पों की महत्ता को आदर्श जीवन की सार्थकता में महत्वपूर्ण माना।
आये हुए संस्कारक गण का और सभी आगानतुको का उत्साही कार्यकर्त्ता मोहन भंसाली ने आभार प्रकट किया..


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