यू.पी.आई. पर नया शुल्क — ग्राहक नहीं, व्यापारी पक्ष पर एम.डी.आर.

आम ग्राहक निश्चिंत रहें, यू.पी.आई. से भुगतान करने पर अलग से कोई शुल्क नहीं

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यू.पी.आई. पर नया शुल्क — ग्राहक नहीं, व्यापारी पक्ष पर एम.डी.आर.
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आम ग्राहक निश्चिंत रहें, यू.पी.आई. से भुगतान करने पर अलग से कोई शुल्क नहीं

यू.पी.आई. को लेकर इन दिनों यह भ्रम तेजी से फैल रहा है कि अब यू.पी.आई. से भुगतान करने पर ग्राहकों से भी चार्ज लिया जाएगा। यह सही नहीं है।

नई व्यवस्था में जहां पात्र लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एम.डी.आर. लागू होगा, उसका संबंध व्यापारी पक्ष से है, ग्राहक से नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यू.पी.आई. से भुगतान करने वाले ग्राहक से कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी.2.पी. भुगतान भी निःशुल्क रहेगा। 

एम.डी.आर. किसे देना होगा-

एम.डी.आर. का अर्थ मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। यह भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी/व्यवसायी पक्ष और भुगतान व्यवस्था से संबंधित शुल्क है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई पात्र व्यापारी ₹10,000 का भुगतान यू.पी.आई. से स्वीकार करता है और उस लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एम.डी.आर. लागू होता है, तो एम.डी.आर. ₹40 होगा।

ग्राहक को ₹10,000 के भुगतान के ऊपर ₹40 अलग से नहीं देना है।

अर्थात ग्राहक के लिए संदेश बिल्कुल स्पष्ट है—

“यू.पी.आई. से ₹10,000 का भुगतान किया है तो ग्राहक के खाते से ₹10,000 ही जाएंगे, एम.डी.आर. के नाम पर अतिरिक्त ₹40 नहीं।”

ग्राहक और व्यापारी को अलग-अलग समझना जरूरी

ग्राहक के लिए :

* व्यक्ति से व्यक्ति यानी पी.2.पी. भुगतान — कोई शुल्क नहीं।
* यू.पी.आई. से भुगतान करने पर ग्राहक से कोई ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं।
* ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट भुगतान पर एम.डी.आर. नहीं।
* ₹2,000 से अधिक के कुछ पात्र व्यापारी लेनदेन में एम.डी.आर. लागू हो सकता है, लेकिन उसका भुगतान ग्राहक से अलग से नहीं लिया जाना है।

व्यापारी के लिए :-

कुछ निर्धारित श्रेणियों और निर्धारित सीमा से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एम.डी.आर. लागू हो सकता है। यह भुगतान व्यवस्था में व्यापारी पक्ष से संबंधित शुल्क है।

उदाहरण-

मान लीजिए आपने किसी दुकान से ₹5,000 का सामान खरीदा और यू.पी.आई. से भुगतान किया।

यदि उस लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एम.डी.आर. लागू होता है, तो एम.डी.आर. ₹20 होगा।

ग्राहक ₹5,000 ही भुगतान करेगा।

व्यापारी के भुगतान निपटान में निर्धारित नियमों के अनुसार एम.डी.आर. की राशि का समायोजन होगा।

इसलिए यह कहना कि “₹5,000 का यू.पी.आई. भुगतान करने पर ग्राहक को ₹5,020 देना पड़ेगा”, सही नहीं है।

₹2,000 की सीमा को भी सही समझें

₹2,000 की सीमा को लेकर भी काफी भ्रम है।

इसका यह अर्थ नहीं है कि ₹2,001 का यू.पी.आई. भुगतान करते ही ग्राहक पर कोई नया शुल्क लग जाएगा।

यह सीमा मुख्य रूप से यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण है कि संबंधित मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर एम.डी.आर. लागू होगा या नहीं।

व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पूरी तरह अलग है

यदि आपने अपने मित्र, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति को ₹25,000 यू.पी.आई. से भेजे, तो यह पर्सन-टू-पर्सन यानी पी.2.पी. ट्रांजैक्शन है।

इस पर एम.डी.आर. नहीं लगेगा।

चाहे राशि ₹1,000 हो, ₹25,000 हो या उससे अधिक—व्यक्ति से व्यक्ति यू.पी.आई. भुगतान निःशुल्क रहेगा। 

सबसे जरूरी संदेश

यू.पी.आई. पर “हर ग्राहक से चार्ज” नहीं लगाया गया है।

एम.डी.आर. और ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क दो अलग बातें हैं। नए प्रावधान में जिन पात्र व्यापारी लेनदेन पर एम.डी.आर. लागू होगा, उसका संबंध व्यापारी पक्ष से है।

इसलिए आम उपभोक्ता को यू.पी.आई. भुगतान करते समय अतिरिक्त शुल्क देने की चिंता नहीं करनी चाहिए।

यू.पी.आई. की सुविधा जारी रहेगी, डिजिटल भुगतान बढ़ता रहेगा और ग्राहक के लिए भुगतान प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी बनी रहेगी।
by 
CA सुधीश शर्मा 
बीकानेर


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