दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी और रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक हुए मेडिकल व पैरामेडिकल छात्र

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

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दवाओं के दुष्प्रभावों की निगरानी और रिपोर्टिंग के प्रति जागरूक हुए मेडिकल व पैरामेडिकल छात्र

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

बीकानेर, 19 सितंबर  
दवाओं के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने तथा उनके प्रतिकूल प्रभावों (Adverse Drug Reactions - ADR) की पहचान व समय पर रिपोर्टिंग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर का फार्माकोलॉजी विभाग एक विशेष पहल कर रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार छिंपा के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में 17 से 23 सितंबर तक रोगी जागरूकता एवं स्वास्थ्यकर्मी संवेदनशीलता प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यक्रम के केंद्र में रहे फार्माकोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार छिंपा ने बताया कि इस पूरे सप्ताह आयोजित हो रहे विशेष अभियानों का मुख्य उद्देश्य आम मरीजों और भावी स्वास्थ्यकर्मियों को दवाओं के दुष्प्रभावों के प्रति सतर्क बनाना है। उन्होंने बताया कि कोई भी मरीज दवाओं के किसी भी संदिग्ध प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी टोल-फ्री नंबर **1800-180-3024** अथवा क्यूआर कोड के माध्यम से सीधे दर्ज करा सकता है। इसके अलावा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्यकर्मी इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC) के संदिग्ध प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया प्रपत्र को भरकर अपनी रिपोर्ट सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज स्थित 'एडीआर मॉनिटरिंग सेंटर' में प्रस्तुत कर सकते हैं।

19 सितंबर 2026 को आयोजित विशेष सत्र के दौरान प्रथम वर्ष के एमबीबीएस एवं पैरामेडिकल विद्यार्थियों को पोस्टर एवं सूचना सामग्री के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी गई। फार्माकोविजिलेंस एसोसिएट पवन सारस्वत ने विद्यार्थियों को दवाओं के संभावित दुष्प्रभावों की पहचान और त्वरित रिपोर्टिंग के तकनीकी पहलुओं से अवगत कराया। कार्यक्रम में डॉ. सुधा नाहटा, डॉ. नजमूल हुसैन, डॉ. योगेश छिपा, डॉ. विकास डूकिया, विष्णु रतन दवे, कमलेश व्यास, ओम प्रकाश कुशवाह, भरत रंगा सहित विभाग का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।


*रोगी सुरक्षा हमारी चिकित्सा प्रणाली की सर्वोच्च प्राथमिकता: प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार*

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार ने फार्माकोलॉजी विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि रोगी सुरक्षा हमारी चिकित्सा प्रणाली की सर्वोच्च प्राथमिकता है। दवाओं के साइड इफेक्ट्स (प्रतिकूल प्रभावों) की समय पर और सटीक रिपोर्टिंग से न केवल वर्तमान मरीज का जीवन सुरक्षित किया जा सकता है, बल्कि भविष्य में होने वाली गंभीर चिकित्सा जटिलताओं से भी बचा जा सकता है। उन्होंने युवा चिकित्सकों व पैरामेडिकल विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे फार्माकोविजिलेंस को अपनी दिनचर्या और कार्यशैली का अनिवार्य हिस्सा बनाएं तथा मरीजों में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाएं।

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