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हजार हवेलियों का शहर के रचनाकार श्री उपध्यानचंद्र कोचर

Shri U C Kochar - Bikaner Raj.                                                                                                                                                                                                                                                                                                                            कविता संग्रह मैं और मेरी कविता **            

मैं उसे रोक नहीं सकता
गलत रास्ते पर जाने से
वह इक्कीस साल का हो चुका है
कहेगा कि आपका रास्ता गलत है
मैं तो न समय
को समझ पाया हूं
न उसको
बुढ़ापे में सचमुच
मति भ्रमित हो जाती है ।

बीकानेर में हजार हवेलियों का शहर पुस्तक के रचनाकार और पर्यटन लेखक संघ के अध्यक्ष एडवाकेट श्री उपध्यानचंद्र कोचर की लेखनी से सभी परिचित हैं। श्री कोचर युवावस्था से ही नामचीन कवियों और अपने अपने क्षेत्र के विख्यात शख्सियतों का सान्निध्य प्राप्त करने वाले रहे हैं और इसका जिक्र उन्होंने अपने स़ प्रकाशित और लोकार्पित पहले कविता संग्रह मैं और मेरी कविता में किया भी है।  80 वर्षी श्री कोचर ने दुनियादारी के बहुत से उतार चढ़ाव देखे हैं। उनकी कविताओं में अनुभव के इशारे तो हैं ही, समाज को अपने नजरिये से देखने के साथ साथ समाज का व्यक्ति को देखने का दृष्टिकोण भी सामने आता है।
श्री कोचर के कविता संग्रह के पेज 27 पर छपी कविता का सिंधी अनुवाद भाई राजकुमार थानवी ने समारोह में वाचन किया था। समारोह में श्री कोचर की कविताओं का बंगाली, उर्दू, अंग्रेजी, पंजाबी आदि कुल आठ भाषाओं में अनुवाद वाचन हुआ था। यहां सिंधी अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूं।
युवा वर्ग के चहेते श्री कोचर ने मेरे पहले सिंधी उपन्यास करतार सिंह का लोकार्पण 2005 में किया था और इसके कथानक बुना हुआ जवाहर कला केंद्र से पुरस्कृत नाटक अपना अपना नाम करतार सिंह का मंचन उन्हीं के हैरिटेज होटल मरुधर के विनायक सभागार में 2008 में मेरे पूर्णावधि नाटक पुस्तक कोलाहल से दूर के लोकार्पण समारोह में सुरेश हिंदुस्तानी के निर्देशन में किया गया था। वह अवसर उपलब्ध कराया था वरिष्ठ रंगकर्मी और संपादक श्री मधु आचार्य आशावादी ने। समारोह भाई हरीश बी शर्मा के संचालन में हुआ था। प्रसन्नता की बात यह है कि (14 Jan 2013) श्री कोचर के पुस्तक लोकार्पण समारोह में राजस्थान संगीत नाटक अकादमी का सदस्य मनोनीत होने पर श्री मधु आचार्य आशावादी सहित अन्य अकादमी सदस्यों का सम्मान भी सारे शहर ने किया।
* ( श्री उपध्यानचंद्र कोचर जी कविता जो अनुवाद उननि जे कविता संग्रह मैं और मेरी कविता मंझु । संग्रह जो लोकार्पण 14 जनवरी 2013 शाम जो थिओ जहिं जलसे में इनि कविता जो अनुवाद वाचन राजकुमार थानवी कयो। संग्रह मूं कुल अठनि कविताउंनि जो अनुवाद जुदा जुदा भाषाउंनि में बीकानेर जे कवि गणनि कयो हुओ। )

मां उनिखे झलण में नाकामु आह्यां
खोटे दग ते वंञी रह्यो आहे
हू इकवीहें जो थी चुक्यो आहे
इकवीहें जो
चवंदो, तव्हां जो दगु खोटो आहे
मां, न त वक्ति खे समझी सघयुसि
न उनिखे
बुढापे मंझु सचपचु
मति मारिजी वेई आहे
बुद्धि अमंूझजी वई आहे।   
                             ( translater - राज कुमार थानवी )
                                    

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