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राजस्थानी रामलीला री तीसरी रात री लीला मांय सीता स्वयंबर अर लिछमण परसुराम संवाद रो होयो मंचन
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राजस्थानी रामलीला री तीसरी रात री लीला मांय सीता स्वयंबर अर लिछमण परसुराम संवाद रो होयो मंचन
घोड़ी अे अधर अधर पग मै'लो म्हारो बाळक बनड़ो छोटो अे
छोटी सी उमर परणाई ओ बाबो सा कांई थारो करयो मैं कसूर
सूरतगढ 10 अक्टूबर
राजस्थानी भासा री मान्यता ने लेयर निरवाळै ढंग सूं आगै बधावण सारु मायड़ भासा रा हेताळुवां अंतरजाळ रै मिस राजस्थानी रामलीला कै मंचण री रीत कोनी टूटण दी। विदेसां में बैठ्या सगळा राजस्थानी आ रामलीला देख'र घणा हरखित होय'र आपणी मरूभौम सूं जुड़ रैया है। बानै इंया लखावै कै जाणै घरै ई बैठ्यां हां।
राजस्थानी भासा आंदोलन में हरमेस सूरतगढ़ आगीवांण रेयो। इणी परम्परा ने आगे निभावता थंका लारलै छह बरसां सूं राजस्थानी मांय रामलीला खेलीज रैयी है। आ सूरतगढ खातर गिरबेजोग बात है। सूरतगढ सूं उठेयोड़ी चिणगारी राजस्थानी री मानता री जोत बणी है। इण बात री साख आखो देस भरै। मंच माथै मायड़भासा राजस्थानी लोककला रंगमंच कानी सू राजस्थानी रामलीला री तीजी रात री लीला मांय सीता स्वयंवर री रंग प्रस्तुति नुंवै रंग संसार में लेय जावै। जिण में राजा जनक , राम लिछमण , परसुराम अर बीजा राजावां रो ठेठ राजस्थानी मांय संवाद अदायगी सरावणजोग रैयी अर देखनआळा घणी सराई। इतरो ई नंई राजा दशरथ रा च्यारूं कंवरां रो ब्याव , जनक अर बां रे भाई री बेटियां रो ठेठ राजस्थानी परम्परा साथै परणीजण रो दरसाव घणो सुंदर बण्यो। जिणा मांय , अबै म्हारी लाडली रो पैलो फेरो अर व्हीर हुवंती वेळा-छोटी सी उमर परणाई ओ बाबो सा रो सजीव दरसाव देख’र देखनआळी लुगाइयाँ री आंख्या छलिजगी।
सातवें बरस खेलीजण वाळी इण राजस्थानी रामलीला री तीसरी रात री लीला रै मंचन में ठेठ राजस्थानी संस्कृति ने सरजीवण दिखाईजी। जिण मांय निकासी, सेळा, जान रो डेरो संस्थाध्यक्ष ओम साबणियां रै घरै राखिज्यो। वारड रा सगळा मौजिज नागरिकां जनेत रो सुवागत करयो।
संवादा री बानगी :-
जनक - मंत्री जी सगळै राजवां नैं स्वयंवर री सरत ऊंची आवाज में सुणा दी जावै । जद किणी राजा सूं धनुष कोनी तोड़िजे तो निराश मन सूं राजा जनक कैवे , अेक ई वीर धनुष कोनी तोड़ सक्यो , म्हानै तो लागै जाणै धरती वीरां सूं खाली होयगी तो लिछमण रीसा मांय आय'र केवै , रंघुवंसी वीरां रे थकां बेजचती बात कैय दी है , अे बोल काळजै में रड़के है , के धरती वीरां सूं खाली होयगी। ईंया परसुराम जी आवै अर शिवजी रो धनुष टुटेड़ो देख’र रिसाणा हुयर कैवे ओ जनक बेगो बता ओ धनुष कुण तोड़्यो हैं , किस्योड़ै इण भरी सभा मं सीता सूं मतो जोड़्यो है बेगो उणरी सूरत बता नई तो सो की उथळ -पुथळ कर नाखूंलो । धरती माथै राज तेरो चैपट कर देवूंला । जेड़ा दरसाव सगळा देखनआळा माथै निरवाळी छाप छोड़ दी।
तीजी रात री लीला रा कलाकार :-
राम - मनोज सुथार, लिछमण - प्रदीप बाजीगर, जनक- संजय किश्नोई , विश्वामित्र - राजकमल, वशिष्ठ - इमरान , रावण - देव भारती, सीता - निखिल स्वामी, दशरथ - अमित कल्याणा , परसुराम - राजू भार्गव , राजा -सुजित , विशाल वर्मा, सोनू नायक , संदीप भांभू , मांडवी , श्रुतकीर्ती , उर्मिला— पुनित , सूर्या , शंकर लाल , फेरां रा पंडित- ओम साबणिया बण्या। बठैई लोक नाच “ घोड़ी अे अधर अधर पग मैलो, म्हारो बाळक बनड़ो छोटो अे ” माथै खुर्शीद , मुर्शीद, सोनू सोनी, पवन भाटी, अरुण घणा फूटरा नाच्या तो विकी नंदा जोकर बणगे घणां हंसाया। निर्देसण मनोज कुमार स्वामी करयो। कलाकारां रो बणाव सिणगार ईशु छिम्पा, कोमल पंडित करयो।
अे बण्या तीसरी रात री लीला रा साखी :-
सिरै पावणा भानुशाली सिंधी समाज रा अध्यक्ष प्रमुदयाल सिंधी , तेजपाल सिंघ , बाबूलाल सुथार , महावीर प्रसाद ,रामेसर दास ,सुरेन्द्र सिंघ राठौड़ , करणी सिंघ , जयवीर सिंघ, दुलीचंद स्वामी भगवान री आरती कर लीला री सरुआत करी अर राजस्थानी भासा री मानता सारू राजस्थानी रामलीला नैं मील रो भाटो बतायो। बठैई राजस्थानी भासा री मान्यता सारू तन-मन-धन रो संकळप दुसरायो।
राजस्थानी रामलीला नै अंतरजाळ माथै आखै जगत नै लाईव दिखावण सारू जै जै राजस्थान री मंडळी लंदन अर ठेट राजस्थानी भासा में खबर छाप'र राजस्थानी भासा नैं मान अर मानता देवण सारू सगळां अखबारां रो काळजै री कोर सूं आभार जतायो। आं सगळां रो नांव इतिहास मांय सोनलियै आखरां में मांडीजण जोग है। लीला मांय मंच रौ संयोजन मनोजकुमार स्वामी कर्यो। पाटवी ओम साबणिया आभार जतायो।
C P MEDIA
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