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भेड़-बकरी के बच्चे में फर्क नहीं करने वाले कर रहे किसान की राजनीति
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर बोला जोरदार हमला
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🔊 भेड़-बकरी के बच्चे में फर्क नहीं करने वाले कर रहे किसान की राजनीतिकेंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर बोला जोरदार हमला
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🔊 *भेड़-बकरी के बच्चे में फर्क नहीं करने वाले कर रहे किसान की राजनीति**केंद्रीय जलशक्ति मंत्री शेखावत ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर बोला जोरदार हमला*बीकानेर/जोधपुर, 11 अक्टूबर । केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राहुल गांधी पर बिना नाम लिया जोरदार हमला बोला। शनिवार देर रात मीडिया से बातचीत में शेखावत ने तंज कसा, देश के राजकुमार वो हैं, जो ट्रैक्टर पर सोफा लगाकर बैठते हैं। जो चुनी हुई सरकार के कागजों को फाड़ सकते हैं। जो भेड़ और बकरी के बच्चे में फर्क नहीं समझते हुए भी किसान की राजनीति करते हैं। उस राजकुमार को पूरा देश अच्छी तरह से जानता है। भाजपा मीडिया विभाग के अचल सिंह मेड़तिया ने बताया कि मीडिया से बातचीत करौली के सपोटरा की घटना से जुड़े सवाल पर शेखावत ने कहा, किसी भी अपराध पर सियासत करना अनुचित भी है और अनावश्यक भी, लेकिन मैं प्रश्न करना चाहता हूं, ये सियासत करने वाले लोग पालघर में कैंडल लेकर क्यों नहीं जाते, सपोटरा में ट्रैक्टर पर बैठकर क्यों नहीं जाते, ये लोग केवल एक प्रांत में होने वाली ऐसी घटना ही उन्हें क्यों दिखाई देती है, बाकि सब जगह उनकी आंखों पर काला चश्मा क्यों चढ़ जाता है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है इस तरह के प्रश्न तो उनसे करने की आवश्यकता है। पीड़ित परिवार को मुआवजे के प्रश्न पर शेखावत ने कहा, मैं कहूंगा किसी भी ऐसी घटना चाहें वहां किसी अबोध बालिका के साथ अमानवीयता हुई हो, मां या बेटी की प्रतिष्ठा के साथ में खिलवाड़ हुआ हो या पुजारी या गरीब का जीवन समाप्त हुआ हो, उसे मुआवजे के साथ में जोड़कर देखना नितांत ही अमानवीय है। किसी परिवार की खोई हुई प्रतिष्ठा या परिवार के खोए हुए परिजन को आप पैसों से वापस नहीं ला सकते। उन्होंने कहा, तत्कालीक सहायता शायद जहां आवश्यक हो, वहां दी जा सकती है, लेकिन न तो पैसों से आंसू पौंछे जा सकते हैं, न हृदय में धधकती अग्नि को ठंडा किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, कल्पना कीजिए, वो दृश्य, पालघर में किस तरह से पीट-पीटकर थाने से बाहर निकालकर पुलिस के सामने दो बूढ़े साधुओं को मार दिया गया। एक बूढ़े साधु को महज जमीन के टुकड़े को हथियाने के लिए तेल डालकर आग लगा दी गई। उसकी कितनी कराह होगी। उसका वीडियो आपने देखा होगा। क्या उसकी कराह और जो पीड़ा उसने सहन की है, वीडियो देखकर परिजनों के मन में जो दर्द और टिस उठी होगी, साधारण आदमी के मन में उठी होगी, क्या किसी पैसे से उसको मरहम लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा, मरहम तभी लगेगा, जब ऐसे अपराधियों को कठोरतम दंड दिया जाए। एक माहौल प्रदेश में बने कि इस तरह का अपराध करने से पहले अपराधी बार-बार सोचे, सात बार सोचे। हाथरस में परिजनों को बेटी का दाह संस्कार न करने देने के सवाल पर शेखावत ने कहा, मैं किसी घटना का समर्थन नहीं कर सकता, लेकिन वहां उन परिस्थितियों की जांच अभी की जा रही है। सीबीआई जांच कर रही है। मुझे लगता है कि जब सेंट्रल एजेंसी किसी विषय की जांच कर रही हो, तब केंद्र सरकार का एक मंत्री और प्रतिनिधि होने के नाते मुझे उस पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। अपने ट्वीट में राजकुमार के जिक्र से जुड़े प्रश्न पर शेखावत ने कहा, आप जानते हैं कि राजकुमार कौन है, देश के राजकुमार, जो ट्रैक्टर पर सोफा लगाकर बैठते हैं, इस देश के राजकुमार जो चुनी हुई सरकार के कागजों को फाड़ सकते हैं, वो राजकुमार जो भेड़ और बकरी के बच्चे में फर्क नहीं समझते हुए भी किसान की राजनीति करते हैं, किसान का साथी होने की बात करते हैं, उस राजकुमार को पूरा देश अच्छी तरह से जानता है। आजकल तो उनके साथ एक राजकुमारी भी पूरी ताकत से लगी हुई है।कोरोना काल में कृषि कानूनों को लेकर क्या जल्दी थी, के प्रश्न पर शेखावत ने कहा, ये जल्दी का विषय नहीं था। किसान की आमदनी दोगुनी करने का लक्ष्य लेकर मोदी सरकार पिछले पांच साल से काम कर रही है। स्वामीनाथन आयोग अटलजी की सरकार के समय बना था। अन्नदाता ने खाद्यान्न में देश को आत्मनिर्भर बनाया और दुनिया के 10 बड़े निर्यातक देशों में ला खड़ा किया। इसके बावजूद किसान की स्थिति खराब होती जा रही थी। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चर पॉलिसी का दर्जा दिया। किसान ने आशा की नजरों से उसको देखा। आठ साल तक यूपीए सरकार रिपोर्ट को तकिया बनाकर सोती रही। स्वामीनाथन आयोग ने केवल एमएसपी की बात नहीं की थी। उन्होंने कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए बहुत सारी अनुशंसाएं कीं। लैंड रिफार्म, इरीगेशन, क्रेडिट फ्लो बढ़े, फसल बीमा, इंट्रीगेटेड एग्रीकल्चर से अल्टरनेटिव सोर्सस ऑफ इनकम खड़ीं हों। किसान के लिए पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रैक्चर मिले, ताकि उसकी फसल का नुकसान न हो। मार्केट रिफार्म्स हों। अंतिम बात होने कही कि एमएसपी लागत का डेढ़ गुना हो। शेखावत ने कहा, लोकसभा में व्यापक चर्चा हुई, लेकिन राज्यसभा में जिस तरह का दृश्य पैदा किया गया, वो लोकतंत्र के लिए काला अध्याय था। उच्च सदन में मर्यादाएं तार-तार हो गईं। आसन के माइक तोड़े गए, कपड़े फाड़े गए, आसन के साथ दुर्व्यवहार हुआ, उनको अपशब्द कहे गए। देश की जनता ने यह सबकुछ देखा है। युवा मतदाता बारीकी से इसे देखता है। राफेल के समय हमने देखा था, कैसे वो हल्केपन पर उतरे और 2019 में जनता ने जवाब दिया। इस बार भी वैसे ही होगा। उन्होंने कहा, ऐसे लोगों को भ्रम है कि वो उपद्रव के रास्ते से सदन को रोकने और अपने हिसाब से चलाने की मंशा रखने वालों को आने वाले समय में जनता सबक सिखाएगी। कृषि कानूनों पर अकाली दल को नहीं समझा पाने और आरएलपी के अलगाव के रास्ते जाने के प्रश्न पर शेखावत ने कहा, फरवरी में अध्यादेश आया, तब अकाली कैबिनेट का हिस्सा थे। किसने उस समय उनका रास्ता रोका था, तब क्यों उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया, तब क्यों एनडीए से संबंध समाप्त नहीं किया। छह महीने तक पंजाब के किसानों के बीच, मंडियों में, अकाली दल के किसान नेताओं के बीच में जाकर, कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर के साथ जाकर, क्यों बातचीत कर रहे थे। अपनी स्थानीय राजनीतिक मजबूरियों और एक अवसर की लालसा में इस तरह के उठाए गए कदमों को लोग अच्छी तरह से समझते हैं। शेखावत ने कहा, आरएलपी के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल से अभी चर्चा नहीं हुई है, लेकिन एक बात में जानता हूं, देश के एक प्रांत पंजाब, जहां सरकार के संरक्षण में आंदोलन चल रहा है, कुछ एक हिस्सा हरियाणा का, इन्हें छोड़कर देश के बाकी किसानों ने आंदोलन क्यों नहीं किया। एक प्रसंग सुनाता हूं, 2015 में अकाल को लेकर लोकसभा में तीन दिन चर्चा चली थी। कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब आदि के नेताओं ने किसानों की खुदकुशी को उठाया, लेकिन मैंने तब सदन में कहा था कि मरू भूमि में 70 में से 63 साल अकाल पड़ा, लेकिन मेरे पश्चिमी राजस्थान में एक भी किसान ने आत्महत्या नहीं की। मेरा किसान उन परिस्थितियों के साथ जिजीविषा के साथ लड़ता है। अपनी आवश्यकताओं को भी उतना ही बढ़ाता है, जितनी उसकी आमदनी है। *किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रही है कांग्रेस*शेखावत ने कहा, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान के गंगानगर-हनुमानगढ़ क्षेत्रों में आड़तियां फसल का खरीदार ही नहीं होता, बल्कि मनी लैंडर भी होता है, जो ब्याज पर काम करता है। किसान को सुविधा भी उपलब्ध कराता है, लेकिन कर्जा देकर किसान को मजबूर कर देता है। ऐसे में किसान सड़क पर आकर आत्महत्या तक करने को मजबूर हो जाता है। मनी लैंडिंग करने वाले ऐसे ही लोग राजनीतिक आकाओं और राज्य सरकार के संरक्षण में कर्ज के तले दबे ऐसे ही किसानों को आंदोलन करने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, किसान कल्याण सम्मेलन के माध्यम से भाजपा ने किसानों को समझने का बीड़ा उठाया है कि नए कानूनों के माध्यम से मोदी जी ने किसानों की मुक्ति का मार्ग निकाला है। सम्मेलनों में किसानों को बताया जा रहा है कि किस प्रकार किसान लाभ उठा सकते हैं। *निगम चुनाव में राज्य सरकार को सबक सिखाएगी जनता*नगर निगम चुनाव पर शेखावत ने कहा, लोकसभा चुनाव में जोधपुर और राजस्थान की जनता ने मुख्यमंत्री का जादुई तिलिस्म तोड़ा था। तब राज्य सरकर अपने हनीमून पीरियड से थी। अब नगर निगम के चुनाव में राजस्थान की जनता राज्य सरकार को जोरदार झटका देने वाली है। राज्य सरकार हर मोर्चे पर विफल हो चुकी है और जनता राज्य सरकार के शासन से उब चुकी है। हर मौके पर जनता ने धोखा खाया है। सरकार टुकड़ों में बंटी हुई है। पिछले 18 महीनों में जनता ने जो दर्द सहा है, उस लेकर शहरी जनता कांग्रेस सरकार को इतना बड़ा झटका देगी, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं होगी।*अचल सिंह मेड़तिया*भाजपा मीडिया जोधपुर
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