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जयपुर । रेलवे ने ऊर्जा संरक्षण के लिए एक नायाब तरीका
इजाद किया है। जिसे प्रदेश के जयपुर
रेल मंडल में भी लागू किया गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रिंसिपल सीईई
एसएम खींची और जयपुर रेल मंडल
के सीनियर डीईई आरके शर्मा ने जयपुर
सहित मंडल के सभी स्टेशनों पर
बिजली की बचत के लिए एक नया
सिस्टम विकसित किया है। जिसके
तहत स्टेशनों पर एक ऑटोमैटिक
टाइमर इंस्टॉल किया गया है। इससे ट्रेन
के जयपुर या अन्य किसी स्टेशन के
प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही 100 प्रतिशत
लाइट ऑन हो जाएंगी। वहीं, ट्रेन के
रवाना होते ही 70 प्रतिशत लाइटें बंद हो
जाएंगी। इस व्यवस्था को सभी स्टेशनों
पर शुरू कर दिया गया है। रेलवे के
सीपीआरओ अभय शर्मा के अनुसार
ऊर्जा संरक्षण के लिए यह व्यवस्था शुरू
की गई है। रेलवे स्टेशनों के विभिन्न
प्लेटफॉर्म पर ट्रेनें न होने के बाद भी
अक्सर पूरी लाइट जलती रहती हैं।
इससे बिजली की खपत भी लगातार
होती है। इसी को देखते हुए रेलवे ने नई
व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।
इस व्यवस्था के लिए रेल प्रशासन ने
लाइटों का एक स्पेशल सर्किट बनाकर
उसे होम और स्टार्टर सिग्नल से जोड़
दिया है। इसके चलते जब ट्रेन होम
सिग्नल पर आएगी तो प्लेटफॉर्म पर पूरी
लाइटें जल जाएंगी। वहीं ट्रेन के स्टार्टर
सिग्नल पर पहुंचते ही आधी लाइटें
स्वत: ही बंद हो जाएंगी। जयपुर मंडल
में इस व्यवस्था से सालाना 25 लाख
यूनिट बिजली की बचेगी। जिससे रेलवे
को 2.5 करोड़ रुपए की बचत होगी।
अकेले जयपुर स्टेशन पर प्रतिमाह 7
हजार यूनिट बिजली बचेगी। जिससे 5
लाख रुपए की बचत की जा सकेगी।
अभी स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर
12 घंटे में करीब 250 यूनिट बिजली
की खपत होती है। नई व्यवस्था लागू
होने के बाद इन 12 घंटों के दौरान
करीब 100 यूनिट बिजली की खपत
होगी। इससे स्टेशन के एक प्लेटफॉर्म
पर करीब डेढ़ लाख रुपए की बिजली
बचेगी।
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हिस
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