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नित्य सुधार न करने वाला ही पशु: डॉ. बिस्सा
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नित्य सुधार न करने वाला ही पशु: डॉ. बिस्सा
आर्यन पब्लिक स्कूल में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम
बीकानेर। आर्यन पब्लिक स्कूल में फेकल्टी डवलपमेन्ट पर वर्कशॉप का आयोजन रखा गया। मैनेजमेंट का सिऋान्त है कि शांतचित्त रहकर जबरदस्त तरीके से कार्य करें और अपने परिणामों के कारण सभी को आश्चर्यचकित कर देवें। कम बोलें, ज्यादा रिजल्ट दें, यही श्रेष्ठ मैनेजमेंट है। यह विचार मैनेजमेंट ट्रेनर डॉ. गौरव बिस्सा ने आर्यन पब्लिक स्कूल द्वारा आयोजित फेकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किये। डॉ. बिस्सा ने प्रभावी बॉडी लैंग्वेज, उत्तम कम्यूनिकेशन, प्रभावी प्रस्तुतिकरण और कंटेंट की अधुनातन अन्कारी को शिक्षक हेतु अत्यावश्यक बताया। शिक्षकों को प्रेरित करते हुए बिस्सा ने कहा कि मनुष्य नित्य प्रति स्वयं में और स्वयं के जीवन स्तर में सुधार करता है लेकिन पशु ऐसा नहीं कर सकता। अत: जो नित्य सुधार न करे, वह पशु ही है। डॉ. बिस्सा ने कहा कि बाहरी संसाधन और सुविधाएं भले ही न मिल पावें लेकिन यदि आंतरिक शक्ति और काम के प्रति जुट जाने का भाव है तो विजय सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि संगठन से प्रेम और कार्य से प्रेम- दो अलग-अलग बातें हैं। दोनों से प्रेम हो तो अच्छी बात है लेकिन कार्य से प्रेम होना अत्यावश्यक है। डॉ. बिस्सा ने कहा कि श्रेष्ठ शरीर, ऊर्जावान कार्यशैली, विषय का उत्तम ज्ञान, ज्ञान का समाज हेतु उपयोग और नैतिक मूल्यों से जुड़ाव ही व्यक्ति का समूचा व्यक्तित्व बनाता है। उन्होंने तनाव को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि मृत व्यक्ति का शरीर एकदम ढीला होता है। जीवित व्यक्ति के शरीर में तनाव होता है, अत: तनाव जरूरी है।संस्था के अध्यक्ष रामजी व्यास ने बताया कि कैसे समय-समय पर डॉ. बिस्सा द्वारा दी गई बहुमूल्य सेवाओं का लाभ संस्था को मिलता आ रहा है और इनके अनुसरण के चलते संस्था लगातार प्रगति के पथ पर गतिमान है। इसी क्रम में संस्था अध्यक्ष रामजी व्यास द्वारा शॉल ओढ़ाकर एवं प्रतीक चिह्न देकर डॉ. बिस्सा का सम्मान किया गया। संस्था प्रभारी हरिप्रसाद व्यास ने डॉ. गौरव बिस्सा का धन्यवाद ज्ञापित किया।प्राचार्य ज्योति कल्ला, कॉर्डिनेटर पूजा मूंधड़ा, काउंसलर रितु पारीक, मुकेश व्यास, अमन गहलोत एवं अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे।
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