Thursday, May 25, 2017

घर बैठे आयुष डॉक्टर से लें परामर्श


1 जून से होम्योपैथी, यूनानी व आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह लें फोन पर

टोल फ्री न. 104 या 108 डायल कर मिलेगी घर बैठे आयुष डॉक्टर परामर्श सेवा

बीकानेर 25/5/17। राज्य में टोल फ्री न. 104 व 108 के माध्यम से संचालित चिकित्सकीय परामर्श सेवाओं में राज्य सरकार अब नए आयाम जोड़ने जा रही है। 1 जून से इस सेवा के अंतर्गत फोन पर एलोपैथी के साथ-साथ यूनानी, होम्योपैथिक व आयुर्वेदिक पद्धति के चिकित्सकों की निःशुल्क परामर्श व सलाह सेवा मिलने लगेगी। यदि किसी व्यक्ति को कोई शारीरिक या मानसिक समस्या है तो किसी भी मोबाइल या लैंडलाइन से टोल फ्री न. 104 या 108 डायल कर आयुष पद्धति से संबंधित चिकित्सकीय सलाह निःशुल्क प्राप्त की जा सकेगी। चिकित्सा निदेशालय जयपुर के राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन लिमिटेड भवन से संचालित चिकित्सकीय परामर्श सेवाओं के साथ ही संचालित होने वाली इस सुविधा को लेकर मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशन में समस्त तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। 

तय रहेगी हर पद्धति की अपनी समय सारणी

 

सीएमएचओ डॉ. देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि 1 जून 2017 से यूनानी चिकित्सकों की सलाह प्रातः 8 से 11 बजे, होम्योपैथिक चिकित्सक की सलाह प्रातः 11 से दोपहर 2 बजे और आयुर्वेदिक चिकित्सा सलाह दोपहर 2 से सायं 6 बजे तक ली जा सकेंगी। इस दौरान प्रशिक्षित चिकित्सक आमजन को विभिन्न बीमारियों से संबंधित चिकित्सकीय सलाह देंगे। यही नहीं उन्हें जरूरत पडने पर नजदीकी चिकित्सालय में जाने के लिए आवश्यकता पर चिकित्सालय के बारे में भी बताएंगे। जिले में पहले से ही विभिन्न पीएचसी पर तैनात आयुष चिकित्सक व राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में नियुक्त आयुष चिकित्सकों द्वारा सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया जा रहा है। 

कई सेवाओं का अनमोल पिटारा है टोल फ्री न. 104 व 108 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इंटीग्रेटेड एम्बुलेंस प्रोजेक्ट में जीवन वाहिनी सेवा, डाॅक्टर से परामर्श, सलाह एवं शिकायत के लिए संचालित टोल फ्री नंबर 104 व 108 की सुविधा शहरी जनता से लेकर दूर दराज में रहने वालों के लिए कमाल की उपयोगी रही है। सप्ताह के साताें दिन 24 घंटे सेवाएं राजस्थानी, हिन्दी या अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं। 

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि पहले से राज्य में संचालित निःशुल्क चिकित्सा परामर्श सेवाओं ने आम जन को खूब लाभान्वित किया है अब आयुष सेवाएं जुड़ने से इसमें सम्पूर्णता आएगी। टोल फ्री 104 या 108 डायल कर प्राथमिक उपचार के लिए सलाह, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी सूचना, वैकल्पिक उपचार, पोषण की सूचना इत्यादि प्राप्त कर सकते हंै। फोन पर ही डाॅक्टर द्वारा उपयोगी घरेलू उपचार के अलावा दवाईयों की सलाह भी दी जाती है जो एस. एम. एस. द्वारा भी भेज दी जाती है। जरूरत पङने पर आपका काॅल उच्चतर विशेषज्ञ को स्थानांतरित कर दिया जाता है। एक बार फोन करने पर रोगी या सुविधा उपयोगकर्ता को एक विशेष आईं. डी. नंबर दिया जाता है, अगली बार फोन करने पर वह उस विशेष आई. डी. नंबर को बताकर आगे की सलाह प्राप्त कर सकता है। ट्राएज के आधार पर चिकित्सा परामर्श सुविधा दी जाती है अर्थात रोगी की स्थिति अनुसार उसे क्रिटिकल/सीरियस/स्टेबल में वर्गीकृत कर उसी अनुसार उचित सलाह दी जाती है। 

डाॅ. चौधरी ने बताया कि सरकार ने बेटी बचाओं अभियान को भी इससे जोड़ दिया है अतः PCPNDT ACT के उल्लंघन से संबंधित मामले जैसे किसी सोनोग्राफी सेंटर/नर्सिंग होम या अन्यत्र कहीं पर भ्रूण के लिंग जांच की जाती हो या कन्या भ्रूण हत्या की जाती हो तो इसकी शिकायत सीधे टाॅल फ्री 104/108 पर की जा सकती है। इस पुनित कार्य हेतु शिकायत कर्ता की पहचान गुप्त रखी जाती है तथा मुखबिर योजना के तहत 2,50,000 रूपये तक ईनाम का भी प्रावधान है। महिला मृत्यु सूचना के लिए भी यही नंबर डायल किए जाते हैं जिसके एवज में विभाग द्वारा सूचना प्रदाता के मोबाइल पर 200 रूपए का रिचार्ज प्रोत्साहन स्वरुप किया जाता है।

जिला आई. ई. सी. समन्वयक मालकोश आचार्य के अनुसार इस सुविधा के तहत स्वास्थ्य परामर्श के अलावा एचआईवी, विवाह संबंधी समस्याओं, परिवार नियोजन, अवसाद, मानसिक दबाव, आत्महत्या की प्रवृति, पुरानी बीमारी, कैंसर आदि विषयों पर काउंसलिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। टोल फ्री नंबंर 104/108 डायल कर सूचना निर्देशिका सेवा के तहत क्षेत्र विशेष के नजदीकी चिकित्सा केन्द्रों, मेडिकल काॅलेज, जाँच केन्द्रों व रिहेबिलिटेशन केन्द्रों की जानकारी भी ले सकते हैं। 

नोडल अधिकारी 104, ओम प्रकाश किराडू ने बताया कि इंटीग्रेटेड एम्बुलेंस प्रोजेक्ट में जीवन वाहिनी सेवा के तहत टोल फ्री नंबर 104/108 द्वारा ही आपातकालीन 108 एम्बुलेंस सेवा का लाभ दिया जा रहा है साथ ही जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस के माध्यम से गर्भवती अथवा माता को, 1 साल तक के बीमार शिशु एवं अति कुपोषित बच्चों को निःशुल्क एम्बूलेंस सुविधा भी दी जा रही है। 

- मोहन थानवी