Thursday, May 25, 2017

बीकानेरी मोठ भुजिया पर 12% जीएसटी का "हथौड़ा"

बीकानेरी मोठ भुजिया पर 12% जीएसटी का "हथौड़ा"

बीकानेर 24/5/17 ( मोहन थानवी ) ।  मरुभूमि की खास उपज "मोठ" से बनी बीकानेरी भुजिया का विकसित होता बाजार केन्द्र सरकार के वित्तीय सलाहकारों को राजस्व प्राप्ति का बड़ा माध्यम लगने लगा है तभी इसकी विकासमान गति को अवरुद्ध करने जैसी कर-योजना के नाम पर 12% जीएसटी का "हथौड़ा" चला दिया गया है। इस हथौड़े की मार मोठ की खेती करने वीले किसान पर भी पड़ेगी क्योंकि मोठ का उपयोग भारी मात्रा में भुजिया बनाने पर होता है। जबकि जीएसटी कर निर्धारण की खामियां बीकानेरी मोठ भुजिया के छोटे व्यवसायियों को तुरंत और बड़े व्यवसायियों को शनै: शनै: मोठ से बनने वाली भुजिया और इसके व्यवसाय से पीछे धकेलने का काम करेंगी।

ऐसे रोष भरे स्वर उन "परिश्रमी-कंठों" से निकले जिन कंठों के धारक खालिस मोठ से भुजिया बना-बना कर बीते दशकों से बीकानेर को भुजियानगरी के रूप में विश्वस्तर तक प्रसिद्धि दिला चुके हैं। यह रोष 24/5/17 को यहां भोमियाजी भवन रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र में तब फूटा जब बीकानेर के भुजिया, नमकीन व चबेना को 12 प्रतिशत कर दायरे में लिए जाने के विरोध में बीकानेर पापड़-भुजिया मैन्यूफेक्चरिंग एसोसिएशन ने संबद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों सहित पत्रकारों के समक्ष भुजिया व्यवसाय की परेशानियां साझा की। दरअसल संगठन ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली और जीएसी परिषद को ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि मरुस्थलीय क्षेत्र के लाखों किसान, गरीब व मजदूरों की रोजी-रोटी से जुड़े खाद्य पदार्थ भुजिया, नमकीन व चबेना को जीएसटी के 5 प्रतिशत कर दायरे में रखी जाए क्योंकि 12% कर लागू हो गया तो न केवल इस व्यवसाय के विकास मार्ग पर बाधा उत्पन्न होगी वरन् बड़ी संख्या में भुजिया श्रमिक और उनके परिवार पीड़ित-प्रभावित होंगे। 

इस मौके पर अपनी बात कहने वालों में ये उद्यमी शामिल हुए - बीकाजी समूह के प्रबन्ध निदेशक, बीकानेर व्यापार उद्योग मण्डल के अध्यक्ष शिवरतन अग्रवाल, बीकानेर पापड़-भुजिया मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गेवरचन्द मुसरफ, महामंत्री मक्खनलाल अग्रवाल, मण्डल के सचिव के.एल.बोथरा, कोषाध्यक्ष घनश्याम लखाणी, नरपत सेठिया, वेदप्रकाश अग्रवाल ‘प्रेमजी’; एस एल हर्भुष । 

बीकानेरी मोठ भुजिया का स्वाद लिए है बाकी भुजिया से अलग --- 

भुजिया मोठ के बेसन से ही बनता है और अधिकांश मोठ मरुभूमि के असिंचित भू-भाग में ही पैदा होती है। 

पहले भी हो चुकी भुजिया पर नजरें टेढ़ी --- 

 पूर्व में भी 1989 व 1998 में केंद्र सरकार ने मरुभूमि के इन खाद्य पदार्थों पर उत्पाद कर लगाया था जिसे विरोध के बाद तुरंत ही वापस ले लिया था। मक्खनलाल अग्रवाल ने बताया कि बीकानेरी भुजिया व नमकीन की खपत के कारण ही किसानों को मोठ के वाजिब दाम मिल रहे हैं। अगर इन पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगा दिया गया तो पहले से ही बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से प्रतिस्पर्द्धा झेल रही बीकानेर की भुजिया व नमकीन उत्पाद इकाईयां बंद होने के कगार पर आ जाएगी जिससे औद्योगिक दृष्टि से पिछड़े इलाके में लाखों किसानों व मजदूरों के समक्ष रोटी-रोटी के संकट पैदा हो जाएंगे। उन्होंने जेटली व जीएसी परिषद से आग्रह किया है कि थार मरुस्थल के लाखों किसानों, गरीबों, मजदूरों, छोटे व लघु उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पूववर्ती सरकारों ने जिन उत्पादों को उत्पाद कर से मुक्त रखा, उन्हें जीएसटी के 5 प्रतिशत कर दायरे में रखकर क्षेत्र के आमजन को राहत प्रदान करें। मुसरफ ने जेटली से अनुरोध किया व आशंका जताई कि जटिल व अधिक कराधान से भौगौलिक विषम परिस्थितियों में कुटीर व लघु स्तर पर भुजिया और नमकीन का उत्पाद कर रहे सैकड़ों छोटे मझौले उद्योग बंद होने की कगार पर आ जाएंगे।

- मोहन थानवी
http://wp.me/p1o9Gx-g8