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बिझनि जी उंञ अंञणु बाकी आहे / थानवी की कविताओं में परंपराओं के साथ आज की बात / मोहन थानवी के काव्य संग्रह ‘‘हालात’’ का लोकार्पण

काव्य संग्रह ‘‘हालात’’ का लोकार्पण
थानवी की कविताओं में परंपराओं के साथ आज के समय की बात
बीकानेर 13 जुलाई,
     नवयुवक कला मण्डल की ओर से आज विश्वास वाचनालय में बहुभाषी साहित्यकार मोहन थानवी के नवीनतम कविता संग्रह हालात का लोकार्पण अतिथियांे ने किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे मानुमल प्रेमज्याणी ने कहा कि नई पीढी सिंधी साहित्य से परिचित हो इसके लिये व्यापक प्रयास किये जाने चाहिये । मुख्य अतिथि सिंधी रचनाकार महादेव बालानी ने कहा कि थानवी ने सिंधी कविता में परम्पराओं के साथ आज के समय की बात को गंभीरता के साथ कहा है। मुख्य वक्ता हासानंद मंगवानी और किशन सदारंगानी ने कहा कि थानवी की कवितायें अपने समय के साथ कदम ताल करती हई सिंध के वैभवशाली अतीत से भी परिचित करवाती है । लोकार्पित कृति हालात पर पाठकीय टिप्पणी करते हुवे शीलू बालानी एंव टीकम पारवानी ने कहा कि संग्रह की कविताओं में विभाजन के दर्द को गहरायी के साथ प्रस्तुत किया गया है । सिंधी लोक गायक चन्द्र प्रकाश आहूजा ने परम्परागत सिंधी लोकगीत तथा थानवी की कविताओं की प्रस्तुति दी।  सिंधी अकादमी के पूर्व सदस्य सुरेश हिन्दुस्तानी ने कहा कि थानवी की कविताये रिश्ते, परम्पराओं ओर आधुनिकता का बेहतर संगम है । लेखकीय वक्तव्य में मोहन थानवी ने अपने सृजन के लिए कार्यस्थल, समाज और शहर के सृजनात्मक एवं सकारात्मक वातावरण को श्रेय दिया । उन्होंने कहा कि सिंधी साहित्य की अपनी विशिष्ट परम्परा है तथा उसका निर्वहन आवश्यक है। थानवी ने संग्रह की अमर गीत, पाखंडी, हालात, फसाद आदि चुनिंदा कविताओं का वाचन भी किया। लेखक का परिचय जय खत्री ने दिया । उन्होंने बताया कि 15 से अधिक नाटकोें के रचयिता मोहन थानवी की अब तक 10 कृतियां प्रकाशित हो चुकी हैं इनमें हिंदी, सिंधी, राजस्थानी में छह उपन्यास, एक पूर्णावधि नाट्य पुस्तक, चार भाषाओं मंे काव्य संग्रह, एक लंबी कविता एवं एक सिंधी काव्य संग्रह शामिल है।  कार्यक्रम का संचालन जयकिशन केशवानी ने किया।
   इस अवसर पर थानवी के सिंधी स्तंभ, पुस्तको एवं आतंकवाद के विरुद्ध 16 ग 2 फीट लंबे कागज पर हस्तलिखित लंबी कविता के फ्लैक्स संस्करण की प्रर्दशनी भी लगायी गई।



                                    (सुरेश हिन्दुस्तानी)
                                        सचिव

मोहन थानवी के लोकार्पित काव्य संग्रह हालात में से चुनिंदा काव्य अंश

सुहांजड़े जो वणु
फिजां खे महकाइंदो रहयो
अम्मां खणी आई हुई
फुटयलि बिझु
विरहांङे वक्तु
पहिंजा सभु गाणा कपड़ा छडे
तुहिंजी याद में
00000
अब्बो पोख में सुम्हे थो
पोख में उथे थो
उम्मेद अथसि
बिझ फुुटंदा
अम्मां समझाएसि थी
बिझनि जी उंञ अंञणु बाकी आहे
00000
नाहें जाय
गायं बधण ऐं तुलसी पोखण लाय
टीवीअ मूं निकरी
शहर खां गोठ डाहुं हली
विदेशी संस्कृति
गोल्हण
असांजी
सभ्यता
0000

सौदो करण में अव्वल
सौदागर
कच्चो निकतो
जहिं हवा में पहिरियों साह खयईं
जिनि बागनि में जायो सजायो थिओ
उननिते आसरो न रखियाईं
घोड़ा उठ हाथी पैदल वेढ़ाहे
वजीर खे अगिते करे
सियासी रांदि कयंई
पहिंजो जीउ जान डिनई
आसरो छडजी वयुसि
0000000000000
कब्जे में करे वरती हुनि
मसाणनि जी जमीन
कुझु माण्हूंनि थू थू कई
कुझु माठ करे वेठा
कुझु पहुंता पंचायत में
कुझु चयो
वाह
आखिरी मंजिल ते
सुजागु थी कराई अथईं
रिजर्वेशन
0000000000000
जहिंखे बि वंझु लगे थो
कुर्सीअ ते झटि वेही
जोर जोर सां चवे थो
मुंहिंजो आहे
सिंघासन

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