Thursday, December 6, 2012

आगे चलते हैं पीछे की खबर नहीं

MUKHAUTE = mohan thanvi

आगे चलते हैं पीछे की खबर नहीं      
अकस्मात तो कुछ भी हो सकता है। जागरूक हो कर चलने वाले को कभी परेषानी का सामना नहीं करना पड़ता। वरना - आगे चलते हैं पीछे की खबर नहीं की तर्ज पर भविश्य प्रभावित हो सकता है। खासतौर से नव धनिकों को आज के ‘‘सेंसेक्स लाइन’’ पर दौड़ते युग में सोच विचार कर ही दांव लगाने चाहिए। बड़े बुजुर्गों ने अपने अनुभवों से ऐसी बातें कही हैं जो व्यक्ति को व्यवहार कुषल बनने में सहयोगी बनती हैं। मैनेजमेंट और व्यक्तित्व विकास के पाठ्यक्रमों में भी ऐसी बातें आज की आवष्यकता के अनुसार नए रंग रूप में ढाल कर षामिल की गई हैं। पैसा और रुतबा कमाने के लिए एक उम्र गुजार दी जाती है किंतु आसानी से धनिक बनने वाली नई पीढ़ी बेखबर रहकर धन राषि खर्चने के लिए कदम उठाती है तो लगता है बस चले जा रहे हैं, कहां पहुंचेंगे खबर नहीं। याद रखना जरूरी है, अकस्मात धन आने के रास्ते खुले है तो जाने के रास्ते बंद करने की जिम्मेवारी भी सामने है।