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समकालीन चूहे और लोहे की तराजू

समकालीन चूहे और लोहे की तराजू   

भेड़िया आया, रँगा सियार जैसी कहानियाँ हमेशा राह दिखाती हैँ।डरने और डराने वालोँ को। दोनों को । सभी को । आखिर लोहे की तुला और चूहे भी तो खत्म ना होवै ...। चूहे और तराजू किसके प्रतीक हैं, कथा में यह समझना उत्तर आधुनिक काल में साहित्यिक जगत में कोलाज की मीमांसा करने जैसा है । जिसे जैसा अनुभूत हो वैसा अर्थ अभिव्यक्त करे ।  जमाना चाहे कोई हो, अमर सँस्कृत साहित्य की कथाएँ जीवन के हर क्षेत्र मेँ प्रासँगिक लगती हैँ। समसामयिक परिप्रेक्ष्य मेँ जीवँत होती दिखती हैँ। छल कपट से भरे पात्रोँ के नकाब उतारने के अलावा ऐसी कहानियाँ मलिन विचारोँ वाले धूर्त पाखँडी लोगोँ की पहचान कराने मेँ भी सहायक हैँ। बड़े बुजुर्गोँ ऋषि मुनि व विषय विशेषज्ञ विद्वानोँ ने सुखी और सफल जीवन जीने के मँत्र साहित्य के जरिये सुरक्षित सँरक्षित रखे हैँ। पँचतँत्र, हितोपदेश लोक कथाएँ , कहावतेँ मुहावरे, लोकोक्तियाँ , लोकगीत , जनश्रुतियोँ मेँ ऐसे "मँत्र" भरे पड़े हैँ।   

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बीमा सेवा केन्द्र का शुभारम्भ

*खबरों में बीकानेर*/ बीकानेर 29 नवम्बर 2017।  भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ विकास अधिकारी हरीराम चौधरी के मुख्य बीमा सलाहकार भगवाना राम गोदारा के बीमा सेवा केन्द्र का शुभारम्भ जूनागढ़ पुराना बस स्टैण्ड  सादुल सिंह मूर्ति सर्किल के पास बीकानेर में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जीवन बीमा निगम के वरिष्ठ मण्डल प्रबन्धक सुधांशु मोहन मिश्र "आलोक" तथा विशिष्ट अतिथि कोलायत विधायक  भंवर सिंह भाटी थे। बीमा सेवा केन्द्र में निगम की पॉलिसियों के बारे में जानकारी तथा प्रीमियम जमा करवाने के साथ-साथ कई प्रकार की सुविधायें उपलब्ध होगी।कार्यक्रम में श्री सुधांशु मोहन मिश्र ष्आलोकष् ने बीमा को आज व्यक्ति की मुख्य आवश्यकता बताते हुये कहा कि जहॉं गोवा राज्य में 79ः  जनसंख्या बीमित है वहीं राजस्थान में यह प्रतिशत मात्रा 20 है जो कि सोचनीय है । उन्होनें कहा कि व्यक्ति और समाज के लिये  आर्थिक सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है जिसकी पूर्ति बीमा के माध्यम से ही सम्भव है। उन्होंनें निगम की ष्बीमा ग्रामष् अवधारणा के बारे में बताते हुये कहा कि बीमा ग्राम घोषित होने वाले गांव को विकास के लिये निगम द्वा…

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् बीकानेर महानगर इकाई में मोनिका गौड़ वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त

विभिन्न संगठनों ने जताई खुशी

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कुर्सी को मुस्कुराने दो : तब्सरा-ए-हालात

जादूगर जादूगरी कर कर गया। कुर्सी मुस्कुराती रही । बाजीगर देखता ही रह गया । उसके झोले से हमें मानो आवाज सुनाई दी  कुर्सी को मुस्कुराने दो ।  गाय घोड़े पशु पक्षियों के चारा दाना तक में घोटाले हुए । सीमा पर दुश्मन से लोहा लेने के लिए खरीदे जाने वाले अस्त्र शस्त्रों में घोटाले हुए। जनता तक एक रुपए में से मात्र 15 पैसे पहुंचने की बातें हुई मगर कुर्सी मुस्कुराती रही। मगर यह कोई जादू नहीं है  कि पेट्रोल  हमारी गाड़ियों को चलाने के लिए वाजिब दामों में  उपलब्ध होने की बजाय  हमारी जेबों में आग लगा रहा है । पेट्रोल ने जेबों में आग लगा दी  कुर्सी मुस्कुराती रही  । बच्चे मारे गए कुर्सी मुस्कुराती रही।  सीमा पर  हमारे जवान शहीद होते रहे  कुर्सी मुस्कुराती रही  । जाति संप्रदाय  आरक्षण के नाम पर  आक्रोश फैलता रहा  कुर्सी मुस्कुराती रही। करनाटक में बिना जरूरत के भव्य नाटक का मंचन हुआ कुर्सी मुस्कुराती रही। लाखों की आबादी के बीच सरकारी अस्पतालों में कुछ लाख रूपये के संसाधनों के अभाव में मरीज तड़पते रहे और न जाने किस बजट से हजारों करोड़ों रुपयों के ऐसे भव्य कार्य हुए जिनकी फिलवक्त आवश्यकता को टाला जा सक…