Sunday, December 2, 2012

तिनके की चटाई नौ बीघा फैलाई

तिनके की चटाई नौ बीघा फैलाई

आदमी का स्वभाव वक्त बीतने के साथ बदलता है और हम कहते हैं वक्त बदल गया। लेकिन आदमी का दिखावा करने का स्वभाव कितना ही वक्त बीत जाएए बदलने का नाम ही नहीं लेता। कोई न कोई कहीं न कहीं किसी न किसी बात पर दिखावा कर ही लेता है। किसी काम को बढ़ा चढ़ा कर भी पेष किया जाता है। तिनके की चटाईए नौ बीघा फैलाई। काम से अधिक प्रचारित करना। गंभीरता से किए जाने वाले कामों का भी ऐसा हश्र होता देख जानकार आदमी अफसोस जताता है। अक्सर सरकारी योजनाओं के प्रचार प्रसार में ऐसा होता है। कुछ निजी क्षेत्र की कपनियां भी अपने लाभ को बढ़ाने के लिए अपने कामों को बढ़ा चढ़ा कर प्रचारित करती हैं। ऐसी ही प्रवष्त्ति किसी व्यक्ति में भी दिख जाती है। बिजनेस के लिए प्रचार करना तो फिर भी समझ में आता है जैसे कि किसी सिनेमा के रिलीज होने के तीन चार महीने पहले से ही प्रतिदिन टीवी चैनल और अखबारों में रोजाना आठ दस बार प्रोमो दिखाना। इस तरह जितनी संख्या में प्रोमो दिखाया जाता है कुल उतने दिनों तक कोई फिल्म सुनहरे पर्दे पर टिकती भी है। इसकी जानकारी हो भी तो फर्क क्या पड़ेगा। हांए सीधा समाज और लोगों के हित से जुड़े सरकारी और अन्य क्षेत्रों के कामों के बारे में ऐसे प्रचार का असर पड़ता है। लोगों की जेब से ही निकाली गई राषि से भरी सरकार की तिजोरी जो खाली होती है। - mohan thanvi - 
बीकानेर एक्सप्रेस से साभार