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एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है...


एलियन और सिनेमाई जादू ... क्या यह पौराणिक है... ! 2009 में प्रकाशित सिंधी नॉवेल केदार साहब से चुनिंदा और संपादित अंश...
एलियनए कींअ न गोलमटोल मुंह वारो सिनेमा में डेखारियो अथवूं! परए असांजे पौराणिक ग्रन्थनि में बि त एहिड़नि चेहरनि जी गाल्हि डाडी बुधाइन्दी आहे! झूलेलाल!
केतराई दफा पाड़े में गोपाल डिठो आहेए होलीअ.डियारीअ खां अगु सिन्धी.पंजाबीए मुल्तानी पाड़े वारा भितनि ते गाइं जे छेणे सांए सिन्दूर ऐं बियूनि रंगदार शयूनि सां ऐहिड़ा लीका पाइन्दा आहिनिए जेके एलियन वांङुरु इ त लगन्दा आहिनि! घणो करे लीका पाइण जो कमु बुढ़यूं माइयूं कन्दयूं आहिनि। त छाण्ण्ण् त छा असांजी सिन्ध में माण्हूनि खे ऐहड़े एलियन जी पहिरी खां इ खबरु हुई! उननि एलियननि खे जूने जमाने में माण्हू देवी.देवताए पित्तर या केंहिं बे नाले सां पुकारीन्दा हुवा!
गोपाल पहिंजी एहिड़नि एलियननि जी दुनिया में गुमु हो ऐं रामी पहिंजी डॉल खे डाडीअ जे अगियूं नचाये पूछेसि पई . अम्माए इनि डॉल खे गाल्हाइणि केंहि सेखारियो! सखीबाईअ खे जयपुर जे डॉ कन्हैया अगनाणी जो लिख्यलि किताबु यादु आयो . बबलूअ खे सिन्धी सेखारियो न बाबा! अजु जे बबलूअ खे त सिन्धी सेखारण लाइ मास्तर रखण बि डुख्यो थी वयो आहेए पर जूने जमाने में असांजी सिन्ध जियूं गुड्डियूं बि सिन्धी गाल्हाइन्दियूं हुइयूं! झूलेलाल! इअं कींअ थी सघन्दो आहे!
सखीबाईए गोपाल ऐं रामी टेई हिकु बे खे पहिंजे दिलु में वसियलु दुनिया सां वाकिफु कराइणि पया चाहिनि। किस्मत जी गाल्हि आहेए टीनि जे मनु जियूं गाल्हियूं मनु में इ दबयलि आहिनि। उवईं जीअं इनि दुनिया जे हरेक षख्स जे मनु जीयूं गाल्हियूं जुबान ते कोन अची सघन्दी आहे।
दिमागु ते जोर डेई सखीबाईअ यादु कयोए  अबाणाए हलु त भजी हलूं जेहिड़ा सिनेमा बि उनिखे यादु आया। हलु त भजी हलूं सिनेमा में त लता मंगेषकर बि हिकु गानो ष्मुंहिंजा सुपरी तोखां विछुड़ीण्ण्ण्ष् गातो हो। सखीबाई पहिंजी सिन्धु जी यादुनि में वरी गुमु थी वई। ऐहिड़िनि गाल्हिनि में भला छो न गुमु थीन्दीए जेके उनिजे नन्ढपणि ऐं मादरेवतन सां गंढयलि आहिनि! हमेषा वांङुरु अजु बि उव्हा पहिंजे जेहनु में वेठलु सिन्धी कलाए सभ्यता ऐं संस्कृति जी गाल्हियूंनि जी उथल.पुथलि में विचरजी वई।
सखीबाईअ जियूं इये गाल्हियूं नन्ढपणि खां केदार बुधियूं ऐं हाणे उनजे बियनि बारनि खे बुधणजो वंझु मिलन्दो आहे। उननि जे दिलोदिमागु में पहिंजी मिठड़ी सिन्धु बाबत बुधलि गाल्हियूं वसी वयूं आहिनि। हाणे इननि बारनि खे बि इननि जी जाण थी वं´ें त नई टहीअ खे अचणि वारे वक्त में सिन्धु ऐं सिन्धीयत विरासतु में मिली सघन्दीए उननि खे पहिंजी सिन्धीयत खे गोलणो कोन पइन्दो।
पहिंजी भाषाए साहित्य ऐं संस्कृतिअ सां उवे परे कोन थीन्दा बल्कि मिठी सिन्धी बोली उननि खे सुरग जेहिड़ी पहिंजी सिन्धु जी महिमा बुधाइन्दी।
फिक्रुरुजी इया गाल्हि आहे। वडनि जी विरासत खे नई टहीअ तांई पुजाइण जो जब्बो पैदा करणो आहे लेकिन अजु सभई पहिंजेई कमनि में पूरा लगा पया आहिनि।
छा सिन्धीयत बाबत अचण वारी नई टही कुझ जाण वठण काण सिन्धी रिसालनि बदरां अंग्रेजीए हिन्दी या बियूनि भाषाउनि जी मुहताज थी वेन्दीएएण्ण्ण् इया चिंता छा केंहिंजे बि दिमागु में कोने!

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