Friday, July 13, 2012

चित्र-मंडित हो मूक रहे जो वह मेरा जीवन नहीं ( काव्यांश ...)

काव्यांश ...
मत भूल संसार में अंग-देश भी है एक और राजा-चित्ररथ6 की रानी है प्रभावती
प्रस्तर-चित्र बनना है अगर तो सूर्य-चित्र का प्रत्यंकन7 कर जीवन में
चित्र-मंडित हो मूक रहे जो वह मेरा जीवन नहीं, जीने की कला का प्रत्यंकन होता नही
बंदूकों के साये और बमों के धमाके में खुलते नहीं फाटक सुख-महल8 के
बंद फाटकों में तो रंभाते हैं गोवंश भी, पीड़ा व्यक्त कर पाते नहीं
अजगर लिपटा रहता है चंदन से जो महकता है  
फूत्कार जहरीली फिर भी अजगर की, उसकी वृत्ति बनी रहेगी
हंतक खुशियों के तुमसे और क्या आशाएं रख सकता है जमाना
अजगर के फूत्कार से भी तप्त वायु और क्या होगा तेरी सांसों के सिवाय
प्रस्तर फिर भी पिघल सकता नहीं, ज्वालामुखी का लावा चाहिये
उद्धारक आयेगा जरूर बदलकर चेहरा तुम्हारा या कि मेरा....
( अंगदेश - काया, /राजा-चित्ररथ - वाणी, जीवन, मन, /प्रत्यंकन - नकल,/ प्रभावती - प्रभावकविता-अंश ...
मत भूल संसार में अंग-देश भी है एक और राजा-चित्ररथ6 की रानी है प्रभावती
प्रस्तर-चित्र बनना है अगर तो सूर्य-चित्र का प्रत्यंकन7 कर जीवन में
चित्र-मंडित हो मूक रहे जो वह मेरा जीवन नहीं, जीने की कला का प्रत्यंकन होता नही
बंदूकों के साये और बमों के धमाके में खुलते नहीं फाटक सुख-महल8 के
बंद फाटकों में तो रंभाते हैं गोवंश भी, पीड़ा व्यक्त कर पाते नहीं
अजगर लिपटा रहता है चंदन से जो महकता है  
फूत्कार जहरीली फिर भी अजगर की, उसकी वृत्ति बनी रहेगी
हंतक खुशियों के तुमसे और क्या आशाएं रख सकता है जमाना
अजगर के फूत्कार से भी तप्त वायु और क्या होगा तेरी सांसों के सिवाय
प्रस्तर फिर भी पिघल सकता नहीं, ज्वालामुखी का लावा चाहिये
उद्धारक आयेगा जरूर बदलकर चेहरा तुम्हारा या कि मेरा....
( अंगदेश - काया, /राजा-चित्ररथ - वाणी, जीवन, मन, /प्रत्यंकन - नकल,/ प्रभावती - प्रभावशाली,/ सुख-महल - वर्ल्ड ट्रेड सेंटर)
ली,/ सुख-महल - वर्ल्ड ट्रेड सेंटर)